जानकारों का कहना है कि टर्की काफी समय से रूस से करीबी रिश्ता बना रहा है। इसी के तहत उसने रूस में बने एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम को खरीदने का फैसला किया था। उसके इसी फैसले से उठे विवाद के बीच अमेरिका ने उसे एफ-35 लड़ाकू विमान के कार्यक्रम से बाहर कर दिया।
आर्दोआन ने कहा- ‘हमने इस प्रोग्राम के लिए 1.4 अरब डॉलर का भुगतान कर दिया था। उसका क्या होगा। हमने ये रकम आसानी से नहीं कमाई थी। इसलिए अमेरिका को या तो हमें विमान देना होगा या फिर पैसा लौटाना होगा।’ टर्की की संसद के पूर्व सदस्य और अब अमेरिकी थिंक टैंक फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के लिए काम करने वाले आइकान अर्देमीर ने अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस.कॉम से कहा कि बाइडन के सत्ता में आने के साथ दोनों देशों के बीच संबंधों की गरमाहट और कम हो गई। इसका एक कारण यह रहा कि बाइडन प्रशासन ने अपने शुरुआत दिनों में टर्की पर मानव अधिकारों के हनन का आरोप लगाते हुए उसकी आलोचना की थी।
जानकारों के मुताबिक आर्दोआन ने अमेरिका के विरोधी व्लादिमीर पुतिन से निकट संबंध बना कर अमेरिका को जवाब दिया है। इससे टर्की के अमेरिकी नेतृत्व वाले सैनिक गठबंधन नाटो से और दूर हो जाने की आशंका पैदा हो गई है। टर्की नाटो का सदस्य है। विश्लेषकों ने कहा है कि अगले महीने रोम में होने वाली जी-20 बैठक के दौरान बाइडन को आर्दोआन से मेलमिलाप करने का एक मौका मिलेगा। लेकिन वहां अगर वे कामयाब नहीं हुए, तो लंबे समय से सहयोगी रहे एक देश से अमेरिका के रिश्ते और बिगड़ सकते हैं।