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फिर निशाने पर अहमदिया: पीओके में इबादतगाह पर हमला, 10 महीने में 40वां मामला, पीड़ितों का पुलिस पर गंभीर आरोप

Sat, 25 Nov 2023 05:22 PM IST
ज्योति भास्कर वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लाहौर

सार

पाक अधिकृत कश्मीर (POK) में अहमदी समुदाय के इबादतगाह पर हमले का मामला सामने आया है। खबरों के अनुसार, हमले में मस्जिद जैसी इमारत की मीनारें ध्वस्त हो गईं। हमले का आरोप 36 से अधिक कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर लगा है।
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पीओके में धर्मस्थल पर हमला (प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : ANI
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विस्तार
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पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में तीन दर्जन से अधिक लोगों ने अहमदी समुदाय के इबादतगाह पर हमला किया। हमलावरों ने मस्जिद जैसी दिखने वाली इमारत में बनी मीनारों को भी ध्वस्त कर दिया। कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी के कार्यकर्ता बताए जा रहे हमलावरों ने अहमदी समुदाय के लोगों को आतंकित भी किया। शनिवार को जमात-ए-अहमदिया पाकिस्तान के अनुसार, इस साल जनवरी से अक्टूबर के बीच कम से कम 40 अलग-अलग मौकों पर हमले हुए हैं। पीओके का हमला सबसे नवीनतम है। इस प्रार्थना स्थल का निर्माण 1954 में हुआ था।
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जमात-ए-अहमदिया पाकिस्तान के अधिकारी अमीर महमूद ने शनिवार को बताया कि तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के सदस्य माने जाने वाले तीन दर्जन से अधिक उपद्रवियों ने शुक्रवार को हमला किया। कोटली जिले के डोलियान जाटान में अहमदी प्रार्थना स्थल को निशाना बनाया गया। उपद्रवियों के हमले के दौरान घटनास्थल पर मौजूद अहमदी लोग अपनी जान बचाकर भागे। हमलावरों ने मीनारों को भी नुकसान पहुंचाया।

अहमदी प्रार्थना स्थल पर हमले के मामले में समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक अमीर महमूद ने बताया कि उपद्रवी मोटरसाइकिलों पर आए थे। हमलावरों ने प्रार्थना स्थल की मीनारों और आले को नष्ट करने के बाद धार्मिक नारे लगाए और फरार हो गए। घटना कोटली के नर्र थाना क्षेत्र में हुई, लेकिन अभी तक संदिग्धों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।
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महमूद का आरोप है कि इस साल के पहले 10 महीनों के दौरान पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में अहमदी अल्पसंख्यक समुदाय के कम से कम 40 प्रार्थना स्थलों को निशाना बनाया गया है। कट्टरपंथी इस्लामिक लोगों ने हमले किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया और कहा, प्रार्थना स्थलों की मीनारों और मेहराबों को ध्वस्त करने में पुलिस भी शामिल रही है। 11 मामलों में हमले सिंध प्रांत में और बाकी हमले पंजाब प्रांत में हुईं।

जमात-ए-अहमदिया पाकिस्तान ने दावा किया कि अधिकांश अहमदी प्रार्थना स्थलों पर टीएलपी कार्यकर्ताओं ने हमले किए हैं। अन्य घटनाओं में पुलिस ने, धार्मिक चरमपंथियों के दबाव में, मीनारों और मेहराबों को ध्वस्त कर परिसर में लिखे गए पवित्र लेख भी मिटा दिए। गौरतलब है कि टीएलपी ने दावा किया है कि अहमदी प्रार्थना स्थल मुस्लिम मस्जिदों जैसी दिखती हैं, क्योंकि उनमें मीनारें हैं।

यह भी रोचक है कि अहमदी खुद को मुस्लिम मानते हैं, लेकिन 1974 में पाकिस्तान की संसद ने इस समुदाय को गैर-मुस्लिम घोषित कर दिया। एक दशक बाद उन्होंने खुद को मुस्लिम के रूप में दिखाने से प्रतिबंधित कर दिया गया। अहमदी समुदाय के लोगों को इस्लाम के अलग-अलग पहलुओं का अभ्यास करने से भी रोक दिया गया। प्रतिबंधित चीजों में किसी ऐसे प्रतीक का निर्माण या प्रदर्शन शामिल है जिसका मुसलमान भी इस्तेमाल करते हों। उदाहरण के लिए मस्जिदों पर मीनार या गुंबद बनाना, या सार्वजनिक रूप से कुरान की आयतें लिखने से प्रतिबंधित किया गया।

हालांकि, लाहौर हाईकोर्ट के एक फैसले के अनुसार, 1984 में एक विशेष अध्यादेश जारी होने से पहले बनाए गए प्रार्थना स्थल वैध माने जाते हैं। अदालत के मुताबिक उनमें बदलाव नहीं किया जाना चाहिए। इन्हें गिराए जाने पर भी रोक लगाई गई है।

पीओके में हमले के मामले में महमूद ने बताया, अहमदी प्रार्थना स्थलों पर हमला करने और उन्हें नुकसान पहुंचाने वाले धार्मिक चरमपंथियों के खिलाफ अब तक एक भी मामला दर्ज नहीं किया गया है। जमात-ए-अहमदिया पाकिस्तान का आरोप है कि देश में पहले से ही हाशिए पर मौजूद अहमदियों के लिए हालात दिन-ब-दिन बदतर होते जा रहे हैं।

जमात के बयान के मुताबिक अहमदियों को लगातार उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। पाकिस्तान के अलग-अलग इलाकों में प्रार्थना स्थलों को आए दिन अपवित्र किया जा रहा है। अधिकारी इन घटनाओं को लगातार नजरअंदाज कर रहे हैं। दोषियों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है।
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