अफगानिस्तान में तालिबान राज के बाद भुखमरी के हालात बनने लगे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि अफगानिस्तान में लोगों का पेट भरने के लिए आर्थिक मदद की जरूरत है नहीं तो भुखमरी के हालात से अफगानिस्तान को कोई नहीं बचा सकता।
अफगानिस्तान में यूएन के विशेष अधिकारी व मानवाधिकार समन्वयक रमीज अकबारोव ने काबुल में कहा कि वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के पास मौजूद खाद्य पदार्थों का स्टॉक सितंबर में खत्म हो जाएगा। इसके बाद लोगं को जरूरी खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना नामुमकिन है। पांच साल के कम उम्र के आधे बच्चे अत्यंत कुपोषित की श्रेणी में आ सकते हैं। यहीं नहीं अफगानिस्तान की एक तिहाई वयस्क आबादी को पर्याप्त खाना तक नसीब नहीं हो सकेगा।
यून के प्रतिनिधि रमीज ने कहा कि 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर की मदद मिलने पर ही हर जरूरतमंद को भोजन दिया जा सकता है। यूएन बच्चों को लेकर अधिक चिंतित है। पर्याप्त पोषण न मिलने से बच्चों का स्वास्थ्य कम समय में ही बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
यूएन की रिपोर्ट के अनुसार, काबुल एयरपोर्ट पर करीब 800 बच्चे हैं, जिन्हें अभी तो जरूरी सुविधाएं और खाद्य पदार्थ दिया जा रहा है। लेकिन दूसरे देशों से मदद नहीं पहुंची तो इन बच्चों को खाना, साफ पानी मुहैया कराना मुश्किल होगा।
आमदनी बंद
यूएन के अनुसार, अफगानिस्तान के 403 जिलों में से 394 में लोगों को मदद पहुंचाई जा रही है। इसमें से 1.8 करोड़ लोगों को आपात फंड से मदद दी जा रही है। संकट की घड़ी में लोगों के पास अपना रोजगार और आमदनी नहीं है। नौकरियां जा चुकी हैं। खाद्य पदार्थों की कीमत में 50 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है।