चीन में सत्ता के केंद्रीकरण का दौर आगे बढ़ रहा है। खबर है कि सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी जल्द ही स्थानीय सरकारों के बहुत से राजनीतिक और आर्थिक अधिकार अपने हाथ में ले लेगी। ऐसा संप्रभुता की रक्षा और सामाजिक स्थिरता कायम रखने के नाम पर किया जाएगा। इस बात के संकेत हाल में कम्युनिस्ट पार्टी की दो सैद्धांतिक पत्रिकाओं में छपे लेखों से मिला है।
लेकिन ताजा लेख में चीन के प्राचीन हान राजवंश में राजनीति रणनीतिकार रहे जिया यी के विचारों का हवाला दिया गया है। यी ने कहा था कि सरकार को स्थानीय प्रशासकों को स्वशासित नहीं होने देना चाहिए। इस कथन के साथ ये दलील दी गई है कि केंद्र सरकार ने अगर आर्थिक क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं किया, तो आमदनी की गैर बराबरी बढ़ेगी और उसकी वजह से सामाजिक अस्थिरता पैदा होगी।
एक दूसरे लेख में कहा गया है कि कुछ तटीय प्रांतों की सरकारों ने केंद्र सरकार की आर्थिक योजनाओं की अनदेखी की है। लेख में यह आरोप भी लगाया गया है कि कुछ स्थानीय सरकारों ने कार्बन उत्सर्जन घटाने की केंद्र सरकार की नीति का पालन नहीं किया है।
ये दोनों लेख उस समय छपे हैं, जब चीन की कम्युनिस्ट का पूर्ण अधिवेशन होने वाला है। ये अधिवेशन बीजिंग में आठ से 11 नवंबर तक होगा। इस सम्मेलन में ‘तीसरा एतिहासिक संकल्प’ पारित किया जाएगा, जिसका मकसद शी जिनपिंग की सत्ता को मजबूत करना बताया गया है। इसके पहले ऐसे संकल्प माओ जे दुंग और देंग श्योओ पिंग के काल में पारित किए गए थे। उन दोनों की हैसियत तब सर्वोच्च नेता की थी। पर्यवेक्षकों का अनुमान है कि तीसरे एतिहासिक प्रस्ताव के बाद शी जिनपिंग की भी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी में वही हैसियत हो जाएगी।