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चीन में सत्ता के केंद्रीकरण का दौर: पार्टी लगाएगी शी जिनपिंग की सोच पर मुहर

Tue, 02 Nov 2021 04:54 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग

सार

चीन के प्राचीन हान राजवंश में राजनीति रणनीतिकार रहे जिया यी के विचारों का हवाला देते हुए एक ताजा लेख में लिखा है कि यी ने कहा था कि सरकार को स्थानीय प्रशासकों को स्वशासित नहीं होने देना चाहिए। इस कथन के साथ ये दलील दी गई है कि केंद्र सरकार ने अगर आर्थिक क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं किया, तो आमदनी की गैर बराबरी बढ़ेगी और उसकी वजह से सामाजिक अस्थिरता पैदा होगी...
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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चीन में सत्ता के केंद्रीकरण का दौर आगे बढ़ रहा है। खबर है कि सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी जल्द ही स्थानीय सरकारों के बहुत से राजनीतिक और आर्थिक अधिकार अपने हाथ में ले लेगी। ऐसा संप्रभुता की रक्षा और सामाजिक स्थिरता कायम रखने के नाम पर किया जाएगा। इस बात के संकेत हाल में कम्युनिस्ट पार्टी की दो सैद्धांतिक पत्रिकाओं में छपे लेखों से मिला है।

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पर्यवेक्षकों का कहना है कि ये लेख ठीक उस समय छपे हैं, जब राष्ट्रपति शी जिनपिंग विभिन्न क्षेत्रों पर अपना अधिक नियंत्रण कायम कर रहे हैं। दोनों लेखों के बारे में एक खबर वेबसाइट एशिया टाइम्स में छपी है। इसके मुताबिक लेखकों ने इस बात की वकालत की है कि केंद्र को स्थानीय सरकारों से कई अधिकार वापस अपने हाथ में ले लेने चाहिए। जानकारों के मुताबिक पिछले कई दशकों से ट्रेंड सत्ता के विकेंद्रीकरण का दौर था। इसके तहत केंद्र के अनेक अधिकार प्रांतों और स्थानीय प्रशासन को दिए गए।

आर्थिक क्षेत्र में हस्तक्षेप की तैयारी

लेकिन ताजा लेख में चीन के प्राचीन हान राजवंश में राजनीति रणनीतिकार रहे जिया यी के विचारों का हवाला दिया गया है। यी ने कहा था कि सरकार को स्थानीय प्रशासकों को स्वशासित नहीं होने देना चाहिए। इस कथन के साथ ये दलील दी गई है कि केंद्र सरकार ने अगर आर्थिक क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं किया, तो आमदनी की गैर बराबरी बढ़ेगी और उसकी वजह से सामाजिक अस्थिरता पैदा होगी।

एक दूसरे लेख में कहा गया है कि कुछ तटीय प्रांतों की सरकारों ने केंद्र सरकार की आर्थिक योजनाओं की अनदेखी की है। लेख में यह आरोप भी लगाया गया है कि कुछ स्थानीय सरकारों ने कार्बन उत्सर्जन घटाने की केंद्र सरकार की नीति का पालन नहीं किया है।

माओ और पिंग के समकक्ष हो जाएंगे जिनपिंग

ये दोनों लेख उस समय छपे हैं, जब चीन की कम्युनिस्ट का पूर्ण अधिवेशन होने वाला है। ये अधिवेशन बीजिंग में आठ से 11 नवंबर तक होगा। इस सम्मेलन में ‘तीसरा एतिहासिक संकल्प’ पारित किया जाएगा, जिसका मकसद शी जिनपिंग की सत्ता को मजबूत करना बताया गया है। इसके पहले ऐसे संकल्प माओ जे दुंग और देंग श्योओ पिंग के काल में पारित किए गए थे। उन दोनों की हैसियत तब सर्वोच्च नेता की थी। पर्यवेक्षकों का अनुमान है कि तीसरे एतिहासिक प्रस्ताव के बाद शी जिनपिंग की भी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी में वही हैसियत हो जाएगी।

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जानकारों का कहना है कि हाल में छपे दोनों लेखों में असल में शी के साझा समृद्धि के विचार को आगे बढ़ाया गया है। इस साल अगस्त में शी ने ये विचार रखा था। इसके तहत आमदनी की गैर बराबरी घटाने का लक्ष्य तय किया गया है। पिछले महीने शी ने एक लेख लिख कर देश में टैक्स सुधार का इरादा जताया था। साथ ही उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और आवास की स्थिति में सुधार का संकल्प लिया था।

हाल में छपे लेखों में शी के ‘वैज्ञानिक आर्थिक नियोजन’ की जम कर तारीफ की गई है। साथ ही इसमें कहा गया है कि उनके मिशन को कैसे पूरा किया जाए, इस बारे में बहुत से अधिकारी सीख ग्रहण कर रहे हैं। लेकिन ऐसे भी अधिकारी हैं, जो केंद्र सरकार की योजना को समझने में विफल हैं। इन लेखों को ऐसे कथित अधिकारियों के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

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