आतंकवाद अब अफ्रीका तक फैल चुका है। यह साहेल, सोमालिया व मध्य व पूर्वी अफ्रीकी देशों में चुनौती बनता जा रहा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यह बात कहते हुए इसे गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने अफ्रीका में आतंकवाद विरोधी अभियानों को मदद करने और सतत वित्तीय मदद पहुंचाने की आवश्यकता बताई।
जयशंकर ने यूएन और अफ्रीकी संघ के बीच सहयोग पर सुरक्षा परिषद में खुली बहस को संबोधित करते हुए कहा कि अफ्रीकन यूनियन मिशन इन सोमालिया (AMISOM), G-5 साहेल ज्वाइंट फोर्स, बहुराष्ट्रीय साझा टास्कफोर्स (MNJTF) को सुरक्षा परिषद व अंतरराष्ट्रीय समुदाय के जबर्दस्त सहयोग की जरूरत है।
एएमआईएसओएम, एक क्षेत्रीय शांति रक्षा मिशन है। यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी से अफ्रीकी संघ द्वारा संचालित किया जा रहा है। अपनी ड्यूटी के तहत यह मिशन सोमालियाई सेना को अल शबाब आतंकियों के खिलाफ जारी जंग में मदद कर रहा है।
इसी तर G-5 साहेल साझा सेना एक टास्कफोर्स है, जिसे माली, बुर्किनो फासो, नाइजर, चाड, मारूटियाना, ने 2017 में तैयार किया है। यह क्षेत्र में हिंसक उग्रवाद व संगठित अपराध के खिलाफ काम करता है। वहीं MNJTF एक बहुराष्ट्रीय सेना है। इसमें बेनिन, कैमरून, चाड, नाइजर व नाईजीरिया की सैन्य इकाइयां शामिल हैं। यह बोको हराम आतंकियों के सफाए में जुटी है।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतेरस के अफ्रीकी देशों में चल रहे आतंकवाद विरोधी अभियानों में मदद के आह्वान का समर्थन किया है। जयशंकर ने कहा कि इनके कार्यों का आकलन कर सतत मदद पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत अपने अनुभव से जानता है कि अफ्रीका में संघर्ष की मूल वजह उसका उपनिवेशवादी इतिहास है। यह मामला शांति व सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए सुरक्षा परिषद को क्षेत्रीय देशों द्वारा अपनाए जा रहे दृष्टिकोण का सम्मान करना चाहिए और क्षेत्रीय संगठनों के साथ आतंकवाद की साझा चुनौती से निपटना चाहिए।