तालिबान के काबुल पर कब्जे के बाद अफगानिस्तान से अमेरिकी नागरिकों को बाहर निकालने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन व उनके अधिकारियों को संघर्ष करना पड़ रहा है।
अमेरिका के लिए बड़ा झटका
यह अमेरिका के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। क्योंकि जो बाइडन व उनके अधिकारियों का अनुमान था कि अमेरिकी सैनिकों के वापस आने के बाद तालिबान को काबुल पर कब्जा जमाने में एक महीने से ज्यादा समय लगेगा, लेकिनअफगानिस्तान की सेना व सरकार बहुत जल्द ही हार गई। अपने अनुमान को गलत मानते हुए अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि गर्मियों के अंत तक 2500 अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान से वापस आ जाएंगे। वहीं छह हजार सैनिक लोगों की मदद के लिए वहां रहेंगे।
जो बाइडेन जल्द कर सकते हैं राष्ट्र को संबोधित
विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने सीएनएन को बताया कि हमें लगा था कि अफगानिस्तान की सेना इतनी जल्दी नहीं हारेगी। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार अफगानिस्तान की स्थिति पर राष्ट्रपति बाइडन जल्द ही राष्ट्र को संबोधित करने वाले हैं। हालांकि, अभी तक इस पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि हो सकता है राष्ट्रपति जो बाइडन जल्द व्हाइट हाउस लौट आएं, लेकिन उन्होंने इसकी पुष्टि नहीं की। रविवार को उनकी एक तस्वीर सामने आई थी, इसमें राष्ट्रपति बाइडन राष्ट्रीय सुरक्षा दल के साथ दिखे थे।
राजनैतिक रूप से बड़ा खतरा
बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिक अफगानिस्तान से सेना वापसी का समर्थन करते हैं। वहीं बाइडन के अधिकारियों का भी मानना है कि पिछले 20 साल से अमेरिका पर बोझ बढ़ता जा रही है। लेकिन, युद्ध के बाद अफगानिस्तान में अराजक स्थिति बन रही है। क्योंकि, अब तालिबान, देश एक बड़े हिस्से को अपने नियंत्रण में बताता है। इसलिए राष्ट्रपति जो बाइडन के लिए यह बड़ा राजनैतिक खतरा माना जा रहा है।
जमीनी आकलन करने में फेल हुआ खुफिया तंत्र
अमेरिकी कांग्रेस के कई सदस्यों ने प्रशासन से जवाब मांगा है कि कैसे उनका खुफिया तंत्र फेल हो गया और वे स्थिति का जमीनी आकलन नहीं कर पाए। रविवार को अफगानिस्तान से लोगों को निकालने के लिए चल रही बैठक में अधिकारियों को सांसदों के कठिन सवालों का सामना भी करना पड़ा। हाउस माइनॉरिटी लीडर केविन मैकार्थी ने रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन व ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ जनरल मार्क मिले से पूछा कि यह सब इतनी जल्दी कैसे हो गया। उन्होंने कहा कि आप कहते हैं कि आपके पास योजना थी। तो क्या हम उन्हें हवाई सहायता नहीं दे पाए। किसी के पास अब इससे बाहर निकलने की योजना नहीं है। आपको लगता है कि यह सिर्फ अफगानिस्तान तक सीमित रहेगा। यह अमेरिका को भी गर्त में ले जाएगा।
उधर, इस सप्ताह के अंत तक बाइडन का भी व्हाइट हाउस वापस लौटने की कोई खबर नहीं है। मंगलवार से बाइडन ने अफगानिस्तान पर कोई टिप्पणी भी नहीं की है।