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अफगान में आतंक: हथियार से लेकर रवैये तक बदल गया है 2021 का तालिबान, जानिए इनके पास कहां से आता है पैसा

Sat, 14 Aug 2021 12:46 PM IST
Trainee Trainee वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली

सार

2016 से 2021 के तालिबान में बहुत बदलाव हुआ है। उनके आय के स्रोत बढ़ गए हैं, उनका सालाना बजट 1.6 बिलियन डॉलर था। उसे खुद को बेहतर बनाने के लिए कई निवेश प्राप्त हो रहे हैं। 
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तालिबान - फोटो : Afghanistan Times
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विस्तार
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90 के दशक से 2021 का तालिबान कुछ अलग दिख रहा है। इसमें कोई शक नहीं है कि तब से अब पूरी दुनिया की ही कायापलट हो गई है। इसी तरह अफगान के आतंकी संगठन ने भी खुद को पूरी तरह से बदल लिया है। खुद अत्याधुनिक दुनिया के साथ बनाए रखने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी है।  उनके हथियार नए और उच्चस्तरीय हैं। हथियारबंद वाहन भी पहले से बेहतर हैं। उनके कपड़े साफ-सुथरे हैं। कुल मिलाकर 2021 का तालिबान अब पहले जैसा तो बिल्कुल नहीं रहा।

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उनकी सोच से लेकर उनके व्यवहार में भी बदलाव हुआ है। पहले अफगानिस्तान में अपने राज के दौरान महिलाओं पर अत्याचार की जो तस्वीरें सामने आती थीं, अब वैसा नहीं है। अब तालिबानी अनुशासित दिखते हैं। वह सिर्फ एक मिशन पर काम कर रहे हैं, जिसका मकसद देश की गनी सरकार को सत्ता से बेदखल कर उस पर अपना कब्जा जमाना है। जैसे देखते-देखते उन्होंने लगभग पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा जमाया है, उससे एक बात तो साफ है कि तालिबान के पास पैसों की कोई कमी नहीं है। 

कहां से आ रहा तालिबान के पास पैसा 
फोर्ब्स के अनुसार, तालिबान की आय का स्रोत नशीली दवाओं की तस्करी, फिरौती व लोगों से मिलने वाला दान है। 2016 तक यह अफगानिस्तान में कोई बड़ा संगठन नहीं था। NATO की खुफिया रिपोर्ट के अनुसार 2019-20 में तालिबान का सालाना बजट 1.6 बिलियन डॉलर था, जो 2016 में फोर्स के अनुमान से 400 गुना अधिक था। आरईएफ की ओर से विभिन्न स्रोत से तालिबान की आय को उजागर किया गया है। नाटो की खुफिया रिपोर्ट के अनुसार तालिबान बहुत तेजी से एक स्वतंत्र सैन्य व राजनैतिक संगठन बनने के लिए आत्मनिर्भर बन रहा है। 
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विदेशी आय में भी कर रहा कटौती
पिछले कुछ सालों में विदेशों से आने वाले दान व मदद में भी तालिबान ने कटौती कर दी है। 2017-18 की रिपोर्ट के अनुसार तालिबान को करीब 500 मिलियन डॉलर विदेशी स्रोतों से मिले थे। वहीं 2020 तक तालिबान ने कुल राजस्व से 15 प्रतिशत तक इसमें कटौती कर दी थी। इसी साल अफगानिस्तान का बजट 5.5 बिलियन डॉलर था, जिसका सिर्फ दो प्रतिशत सैन्य सुरक्षा में खर्च किया गया था। जबकि, तालिबान से अफगानिस्तान की सुरक्षा के नाम पर अमेरिका से बड़ी वित्तीय सहायता ली गई थी। 

अमेरिका के मुकाबले जमा रहा अपने पांव 
उधर, अमेरिका जो अब अफगानिस्तान से अपने सैनिकों को वापस ले जा रहा है, वह पिछले 19 सालों में तालिबान से लड़ाई व अफगान फोर्स को प्रशिक्षित करने में कई ट्रिलियन डॉलर खर्च कर चुका है। अब ऐसा लगता है कि अफगानिस्तान में तालिबान अमेरिका के मुकाबले अपने पांव जमा रहा है। 
पूर्ण आर्थिक दृष्टिकोण से देखें तो तालिबान को खुद को बेहतर करने के लिए बेहतर निवेश प्राप्त हो रहा है। जिससे वह नाटो व अमेरिका द्वारा बनाई गई खाईं को  भरने के लिए खुद को तैयार कर रहा है। यही एक कारण है कि अफगानिस्तान हार की कगार पर खड़ा हो गया है। 

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