तालिबान अपने वादों को पूरी तरह निभाए यह सुनिश्चित करने के लिए रूस अमेरिका, चीन और पाकिस्तान के साथ संपर्क में है। रूस खासतौर पर अफगानिस्तान में एक समावेशी सरकार बनाने और कट्टरपंथ के प्रसार पर रोक लगाए जाने को लेकर फिक्रमंद है। शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए उद्बोधन व उसके बाद आयोजित प्रेस वार्ता में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लाव्रोव ने कहा कि मौजूदा तालिबानी सरकार में संपूर्ण अफगानी समाज की झलक नहीं दिखती है।
जबकि, तालिबान ने वादा किया था कि वह समावेशी सरकार बनाएगा और यह इसके अतीत के शासन से अलग दौर होगा, जिसमें अफगानी जमीन को आतंक के लिए इस्तेमाल नहीं करने दिया जाएगा और महिलाओं व अल्पसंख्यकों को सम्मान व अधिकार दिया जाएगा। लाव्रोव ने कहा- हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण व प्राथमिकता का विषय तालिबान से वादों को पूरा कराना है।
संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को कमजोर कर रहा पश्चिम
इसके अलावा उन्होंने बाइडन प्रशासन की जल्दबाजी में अफगानिस्तान छोड़ने के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका व नाटो सहयोगियों ने यह फैसला नतीजों की परवाह किए बिना लिया। उन्होंने वहां तमाम हथियारों को यूं ही छोड़ दिया जिनका इस्तेमाल विध्वंसक गतिविधियों में किया जा सकता है।