सबसे शक्तिशाली अमेरिका को भी अफगानिस्तान छोड़कर भागना पड़ा तो इसके पीछे तालिबान की मजबूत आर्थिक स्थिति भी एक वजह है, जिसे वह और अफगानिस्तान सरकार रोकने में नाकाम रहे।
नाटो की एक गोपनीय रिपोर्ट में मुल्ला याकूब के हवाले से बताया गया
साल 2020 में तालिबान ने 106 करोड़ अमेरिकी डॉलर कमाए। जब इसी साल अफगान सरकार का बजट 555 करोड़ डॉलर था। इसके 4 साल पहले फॉर्ब्स ने तालिबान की कमाई 40 करोड़ डॉलर आंकी थी। यानी 4 साल में कमाई ढाई गुना से ज्यादा बढ़कर उसने एक बड़ी सेना को बनाने और सरकार पर कब्जा करने के लिए जरूरी आर्थिक क्षमता हासिल की।
तालिबान आतंकी 60 से 85 हजार हैं
- आतंकियों की संख्या करीब चार करोड़ की आबादी वाले अफगानिस्तान से कहीं कम थी, और कमाई अफगानिस्तान के बजट का 20 प्रतिशत।
- इसी ताकत से उसे न विभिन्न मोर्चों पर बढ़त मिली, साथ ही एक बड़ी आबादी को अपने पक्ष में करने में भी मदद मिली।
तालिबान के पास पैसा आता कहां से है?
1. मादक पदार्थों से कमाई 41.6 करोड़ डॉलर
अफगानिस्तान में विश्व का 84 प्रतिशत अफीम उगाया जाता है। यहां अधिकतर उत्पादन सरकार की अनुमति के बिना होता रहा। इसे तालिबानी आतंकियों का पूरा समर्थन था। इसके एवज में 2008 से उसने 10 प्रतिशत टैक्स वसूला। बाद में उत्पादन अपने नियंत्रण में ले लिया।
-संयुक्त राष्ट्र संघ विश्व मादक पदार्थ रिपोर्ट 2020
2. इस्लामी टैक्स से वसूली 16 करोड़ डॉलर
अपने नियंत्रण वाले हिस्सों में समानांतर सरकार बनाने के साथ तालिबानियों ने नागरिकों से लेकर उद्योगों पर टैक्स लगाए। किसानों पर 10 प्रतिशत अशर और अमीर लोगों पर 2.5 प्रतिशत जकात जैसे इस्लामी टैक्स प्रमुख थे।
लोगों की दुकानों से लेकर खनन, कई कंपनियों और विकास परियोजनाओं पर भी टैक्स वसूली हुई, जिसकी बकायदा से रस्सीदें दी जाती।
- जानकारी का स्रोत : तालिबानी फरमान