तालिबान की कथनी और करनी में शुरू से अंतर रहा है। आगस्त में तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद कई वादे किए थे। उसमें से एक लड़कियों की शिक्षा भी था। हालांकि अब तक उसने वादा नहीं पूरा किया है। लड़कियों को शिक्षित करने पर प्रभावी प्रतिबंध तालिबान की 1996-2001 की पिछली सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों को प्रतिबिंबित करता है।
जब महिलाओं के लिए रोजगार बंद था और लड़कियों को स्कूल जाने की अनुमति नहीं थी। वहीं तालिबान के दावे पर संयुक्त राज्य अमेरिका से लेकर रूस समेत कई देशों में संदेह बना हुआ है। इन देशों की ओर मांग की जाती रही है कि तालिबान वादों को पूरा करे।
तालिबान ने मंगलवार को अफगानिस्तान में विदेशी मुद्रा के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। अफगानिस्तान में तालिबान का यह एक ऐसा कदम है जिससे देश की अर्थव्यवस्था और मुश्किल में आ सकती है।
समूह ने अपने एक प्रवक्ता द्वारा पत्रकारों के साथ साझा किए गए एक बयान में कहा, देश में आर्थिक स्थिति और राष्ट्रीय हितों के लिए आवश्यक है कि सभी अफगान अपने हर व्यापार में अफगान मुद्रा का उपयोग करें। अमेरिकी डॉलर का उपयोग अफगानिस्तान के बाजारों में व्यापक है, जबकि सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापार के लिए पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों की मुद्रा का उपयोग किया जाता है। तालिबान सरकार अरबों डॉलर के केंद्रीय बैंक के भंडार को जारी करने के लिए दबाव बना रही है। हिंसाग्रस्त देश नकदी की कमी, भुखमरी समेत कई संकट का सामना कर रहा है।