तालिबान के आने से पहले तक अफगानिस्तान के बदगीस प्रांत में पश्चिमी फर्ज कोह में मीडिया हाउस के लिए काम करने वाले जबीहुल्ला वफा अब अपने दस लोगों के परिवार को पालने के लिए ईंट भट्टे पर मजदूरी करते हैं। वफा उन हजारों लोगों में से एक हैं, जिन्होंने तालिबान के आगमन के बाद अपना रोजगार खोया है।
खामा प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, वफा कहते हैं- मैं 10 वर्ष से पत्रकारिता में था। तालिबान के आने के बाद मुझे नौकरी से निकाल दिया गया। अब मैं परिवार का पेट भरने के लिए ईंट भट्टे पर मजदूरी कर रहा हूं। वफा ने बताया कि सैकड़ों पत्रकार हैं जो उनके ही जैसे हालात से गुजर रहे हैं।
तालिबान पर समीक्षा करेगी यूएन कमेटी
अफगानिस्तान के यूएन में प्रतिनिधित्व को लेकर संयुक्त राष्ट्र प्रमाणन समिति की बैठक अगले माह हो सकती है। यह समिति तालिबान द्वारा नामित दूत सुहैल शाहीन को यूएन में मान्यता देने पर फैसला करेगी। म्यांमार व अफगानिस्तान को हाल ही में यूएनजीए में बोलने का मौका नहीं मिला था।
महासभा अध्यक्ष अब्दुल्ला शाहिद ने कहा, समिति की रिपोर्ट पर यूएन कोई फैसला करेगा। शाहिद ने शुक्रवार को कहा, मैं समिति के संपर्क में हूं। स्वीडन समिति का अध्यक्ष है। मैंने समिति अध्यक्ष को तालिबान के पत्र से अवगत करा दिया है। आमतौर पर समिति नवंबर में बैठक करती है, दिसंबर में महासभा के सामने रिपोर्ट नहीं लाई जाती है और मुझे यकीन है कि स्वीडन प्रमाणन कार्यक्रम को बनाए रखेगा।