श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे
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श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने शुक्रवार को स्वीकार किया कि उन्होंने रामबुकाना के दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में हुई हिंसा को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक में शामिल नहीं होकर गलती की। नवीनतम ईंधन मूल्य वृद्धि के बाद निहत्थे सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने गोलियां चलाई थी जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।
पीएम राजपक्षे बोले, बैठक में मुझे बुलाया गया था
उनकी टिप्पणी विपक्ष के नेता साजिथ प्रेमदासा की आलोचना के जवाब में आई कि रामबुकाना घटना पर चर्चा करने के लिए प्रधानमंत्री को एनएससी की बैठक में क्यों नहीं आमंत्रित किया गया था। इस पर महिंदा ने कहा, मुझे बुलाया गया था। लेकिन मैं उपस्थित नहीं हुआ। यह मेरी गलती है। लेकिन मुझे उस शाम की घटना के बारे में बताया गया था।
रामबुकाना में हुई हिंसा में 41 वर्षीय चामिंडा लक्षन की मौत हो गई थी। 1948 में ब्रिटेन से आजादी के बाद से श्रीलंका अभूतपूर्व आर्थिक उथल-पुथल से जूझ रहा है। संकट विदेशी मुद्रा की कमी के कारण है, जिसका अर्थ है कि देश मुख्य खाद्य पदार्थों और ईंधन के आयात के लिए भुगतान नहीं कर सकता है, जिससे जबरदस्त आर्थिक संकट पैदा हो गया है। महंगाई बहुत ज्यादा बढ़ गई है।
श्रीलंका देश के इतिहास में अब तक के सबसे खराब आर्थिक संकट से गुजर रहा है। इस द्वीप राष्ट्र के कर्ज में डूबी अर्थव्यवस्था के कारण सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। राष्ट्रपति राजपक्षे और उनकी श्रीलंका पोदुजाना (पेरामुना) के नेतृत्व वाली सरकार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं।
इस बीच पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) सीडी विक्रमरत्ने सहित श्रीलंका के शीर्ष पुलिस अधिकारी शुक्रवार को देश के मानवाधिकार आयोग के सामने हिंसा के बारे में अपना बयान दर्ज कराने के लिए पेश हुए। जनता को भड़काकर विरोध को बढ़ाने के लिए पुलिस की आलोचना की गई है। हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई और 13 अन्य घायल हो गए थे।
श्रीलंका की मदद करेगा चीन: राजपक्षे
राजपक्षे ने कहा कि उन्होंने अपने चीनी समकक्ष ली केकियांग के साथ बातचीत की और द्वीपीय देश के सबसे बुरे आर्थिक संकट के दौरान लोगों की आजीविका व कल्याण को प्रभावित करने वाली अहम जरूरतों को पूरा करने में उनकी सरकार को सहयोग का आश्वासन देने के लिए उनका आभार जताया।