यूक्रेन पर रूसी हमले को लगभग दो महीना पूरा होने जाने के बावजूद एशिया में रूस के कच्चे तेल का आयात बड़े पैमाने पर जारी है। जापान, दक्षिण कोरिया, चीन और भारत उसके सबसे बड़े खरीदार बने हुए हैं। ये बात ताजा टैंकर ट्रैकर डाटा से सामने आई है। रूस ने 24 फरवरी को यूक्रेन पर हमला किया था। तब से 18 अप्रैल तक के आंकड़े फिलहाल उपलब्ध हुए हैं।
रूस से एशिया भेजे गए टैंकरों में 52 चीन, 28 दक्षिण कोरिया, 25 भारत, नौ जापान और एक मलेशिया के लिए था। इसका मतलब है कि इस अवधि में रूस से भारत भेजे गए तेल में आठ गुना बढ़ोतरी हुई। जबकि चीन को निर्यात हुए तेल में 33 फीसदी का इजाफा हुआ। जबकि साझा तौर पर अन्य देशों के आयात में 16 फीसदी की गिरावट आई।
अमेरिका और ब्रिटेन ने एलान किया है कि यूक्रेन पर हमले के विरोध में वे रूस से तेल का आयात रोक देंगे। दोनों देशों की इस घोषणा के पहले ही तेल कारोबार से जुड़ी कंपनियों बीपी और शेल ने कहा था कि वे अब रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदेंगी। इन घोषणाओं के कारण यूरोप में रूसी तेल का भाव काफी गिर गया। रिफिनिटिव डाटा के मुताबिक मार्च के शुरू में यूरोप में रूसी तेल का भाव 111 डॉलर प्रति बैरल था, जो अप्रैल के मध्य में 78 डॉलर रह गया।
इंडोनेशिया के ऊर्जा मंत्री ने कहा है कि उनके देश ने हाल में रूस से तेल नहीं खरीदा है, लेकिन अब संभव है कि वह ऐसा करे। इससे इंडोनेशिया के अंदर तीखी बहस खड़ी हो गई है।
टैंकर ट्रैकर कंपनी पेट्रो-लॉजिस्टिक्स के सीईओ डैनियर गेर्बर ने वेबसाइट निक्कई एशिया से कहा कि संभवतः भारत और चीन ही मौजूदा बने हालात का सबसे ज्यादा फायदा उठाएंगेँ। उन्होंने कहा- मार्च में तो उन देशों का रूसी तेल का आयात बहुत ज्यादा नहीं बढ़ा। लेकिन अगले दो या तीन महीनों में हम ऐसा होता देख सकते हैं।
विश्लेषकों ने कहा है कि भारत और चीन ने यूक्रेन मामले में स्पष्ट रुख अपनाया है। लेकिन जापान या दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाने का एलान करने के बावजूद रूसी तेल का आयात पूरी तरह नहीं रोका है।