अब वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक न्यू अमेरिका ने एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें 251 ऐसे हत्याकांडों का विश्लेषण किया गया है, जिसके पीछे इस थिंक टैंक ने अमेरिका के घरेलू आतंकवादियों का हाथ बताया है। ये सभी घटनाएं 9/11 के बाद की हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस अवधि में धुर दक्षिणपंथी गुटों ने 144 लोगों की हत्या की। जबकि इसी दौरान ‘जिहादी’ गुटों ने 107 हमले किए, जिनमें 14 लोग मारे गए। न्यू अमेरिका के मुताबिक घरेलू आतंकवादी गुटों में सरकार विरोधी, प्राइवेट हथियारबंद समूह, श्वेत वर्चस्ववादी, और गर्भपात विरोधी आदि गुट शामिल हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है- ‘अमेरिका में हुए आतंकवादी हमले ज्यादातर विदेशी घुसपैठियों ने नहीं, बल्कि उन लोगों ने किए जो अमेरिका के नागरिक या यहां के वैध निवासी हैं।’ रिपोर्ट में कहा गया है कि अल-कायदा या आईएसआईएस जैसे गुटों की हिंसा पर अमेरिका सरकार सख्ती से कदम उठाती है। लेकिन श्वेत वर्चस्ववादियों की तरफ से बढ़ते खतरों के बावजूद उनके प्रति सरकार का रुख नरम रहा है।
इसके पहले 2019 में थिंक टैंक ब्रेनन सेंटर फॉर जस्टिस की रिपोर्ट में भी कहा गया था कि श्वेत चरमपंथियों के हमलों पर सरकार की प्रतिक्रिया नाकाफी रही है। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि ऐसी घटनाएं होने पर अकसर आतंकवाद से संबंधित धाराएं नहीं लगाई जातीं। उन मामलों में गिरोहों की हिंसा या ऐसे ही कम सजा वाले अपराधों की धाराएं लगाई जाती हैं। न्यू अमेरिका की ताजा रिपोर्ट के लेखकों में से एक डेविड स्टरमैन ने ब्रिटिश अखबार द गार्जियन से कहा- ‘धुर दक्षिणपंथ पर उतना ध्यान नहीं दिया गया है, जितना दिया जाना चाहिए था।’ जानकारों का कहना है कि यही लापरवाही अब अमेरिका को भारी पड़ रही है।