कर्ज में डूबे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) ने बड़ा झटका दे दिया है। आईएमएफ ने उसे छह अरब डॉलर का कर्ज देने से साफ इनकार कर दिया है।
यह बड़ा कर्ज पाने लिए पाकिस्तान के वित्त मंत्री शौकत तारिक बीते 11 दिनों से वॉशिंगटन में डेरा डालकर मुद्राकोष की मान मनौव्वल कर रहे थे, लेकिन आईएमएफ टस से मस नहीं हुआ। पाकिस्तान के अखबार ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के अनुसार वित्त मंत्री तारिक चार अक्तूबर से वॉशिंगटन में आईएमएफ के अफसरों से यह कर्ज मंजूर करने के प्रयास कर रहे थे। मुद्राकोष चाहता था कि पाकिस्तान अपने नागरिकों से ज्यादा कर राजस्व वसूल करे। इस पर पाकिस्तान ने बिजली व ईंधन के दाम भी बढ़ा दिए थे, फिर भी आईएमएफ नहीं माना।
गारंटी देने को भी तैयार नहीं कोई देश
मुद्राकोष के अधिकारियों का कहना है कि इमरान सरकार की नीतियों के कारण देश में कर राजस्व बढ़ना मुश्किल है। इससे देश की अर्थव्यवस्था तबाही की ओर बढ़ रही है। पाकिस्तान को अब कर्ज की गारंटी देने के लिए भी कोई तैयार नहीं है। सऊदी अरब के बाद चीन ने भी अपने खास दोस्त के कर्ज की गारंटी देने से इनकार कर दिया है।
इमरान सरकार के मित्र हैं भ्रष्ट कारोबारी
पाकिस्तान मूल के अमेरिकी कारोबारी साजिद तरार का कहना है कि इमरान सरकार देश में कर राजस्व बढ़ा ही नहीं सकती है, क्योंकि पाकिस्तान का बड़े कारोबारी भ्रष्ट हैं और वे ही इमरान सरकार के मित्र हैं। तरार के मुताबिक यदि पीएम इमरान खान टैक्स बढ़ाना भी चाहेंगे तो उसके ये मित्र मिनटों में उनकी सरकार गिरा देंगे। ऐसे में वह बिजली और तेल महंगा कर पाकिस्तान के गरीबों पर ही बोझ़ा बढ़ा सकती है।
पाकिस्तान की हालत इतनी खस्ता है कि डॉलर के मुकाबले पाकिस्तान रुपया लगातार नीचे आ रहा है। वर्तमान में पाक मुद्रा बाजार में डॉलर के दाम 172 रुपये पर पहुंच गए हैं। वहीं जनता महंगाई की आग में झुलस रही है। मुद्रास्फीति दर 12 फीसदी पर जा चुकी है। पाकिस्तान पहले से विश्व के उन 10 देशों में शामिल है, जिन पर पर सबसे ज्यादा कर्ज है।