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अफगानिस्तान : अमीर मुत्तकी बना देश का नया विदेश मंत्री, पिछली तालिबानी सरकार में था उच्च शिक्षा मंत्री

Tue, 07 Sep 2021 10:27 PM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल

सार

अमीर मुत्तकी को तालिबानी सरकार में नया विदेश मंत्री बनाया गया है। मुत्तकी तालिबान की पिछली सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री था। मुत्तकी पंजशीर विद्रोहियों से समझौता करने के लिए हर संभव कोशिश भी कर चुका है। हालांकि उसे इसमें सफलता नहीं मिल सकी थी।  
 
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तालिबान(फाइल फोटो) - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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तालिबान ने अफगानिस्तान में नई सरकार के गठन के साथ-साथ मंत्रिमंडल विस्तार की भी घोषणा कर दी है। इसके तहत मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद को जहां नया प्रधानमंत्री बनाया गया है वहीं अमीर मुत्तकी को देश का नया विदेश मंत्री बनाया गया है। मुत्तकी तालिबान की पिछली सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री था। अमीर मुत्तकी तालिबान के प्रमुख वार्ताकारों में से एक माना जाता है। बताया जाता है कि पंजशीर विद्रोहियों से समझौता करने के लिए मुत्तकी को ही भेजा गया था लेकिन वार्ता असफल रही थी।

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मुत्तकी ने संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व वाली वार्ता में सूचना और संस्कृति मंत्री के तौर पर तालिबान सरकार के प्रतिनिधि के रूप में कार्य कर चुका है। वह अफगान जिहाद के दौरान मौलवी मोहम्मद नबी मोहम्मदी के समूह का हिस्सा था लेकिन बाद में तालिबान आंदोलन में शामिल हो गया।

बता दें कि इससे पहले  अमीर खान मुत्ताकी ने 5 नवंबर, 2001 को काबुल में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया था। इस दौरान उसने कसम खाई थी कि तालिबान अमेरिका के नेतृत्व वाले सैन्य अभियान का विरोध करेगा और अफगानिस्तान में जमीनी बलों के इस्तेमाल के खिलाफ चेतावनी भी जारी की थी। मुत्ताकी ने कहा था कि अमेरिकी शक्ति जिसे दुनिया एक शक्तिशाली ताकत कहती है, असफलता का सामना करेगी।
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जानिए मंत्रिमंडल में और किन-किन नेताओं को मिली जगह
खैरउल्लाह खैरख्वा को सूचना मंत्री का पद दिया गया है। अब्दुल हकीम को न्याय मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। शेर अब्बास स्टानिकजई को डिप्टी विदेश मंत्री बनाया गया है। वहीं जबिउल्लाह मुजाहिद को सूचना मंत्रालय में डिप्टी मंत्री का पद दिया गया है। 

जानिए कौन हैं नए पीएम मुल्ला हसन अखुंद
मुल्ला हसन अखुंद फिलहाल रहबारी शूरा (लीडरशिप काउंसिल) के प्रमुख हैं। रहबारी शूरा तालिबान से संबंधित शक्तिशाली निर्णय लेने वाली संस्था है। मुल्ला हसन अखुंद का जन्म उसी कंधार में हुआ है जिससे तालिबान की भी शुरुआत हुई थी। सशस्त्र आंदोलन की शुरुआत करने वाले नेताओं में मुल्ला हसन अखुंद भी शामिल थे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अखुंद ने रहबारी शूरा के प्रमुख के रूप में 20 वर्षों तक काम किया और तालिबानी लड़ाकों के बीच उनकी अच्छी पैठ मानी जाती है। तालिबान नेताओं का दावा है कि सैन्य पृष्ठभूमि के बजाय उनकी धार्मिक पृष्ठभूमि अधिक है और वह अपने चरित्र और भक्ति के लिए जाने जाते हैं। मुल्ला हसन को 20 साल से अधिक से शेख हिबतुल्ला अखुनजादा का करीबी बताया जाता है।

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