लेकिन इस सर्वे से यह भी सामने आया कि नौजवानों को पश्चिमी व्यवस्था ज्यादा लुभाती है। क्या आप सोवियत व्यवस्था की वापसी चाहते हैं, इस सवाल पर 18 से 24 वर्ष उम्र वर्ग के नौजवानों में सिर्फ 30 फीसदी ने ‘हां’ कहा। जबकि 55 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में सोवियत व्यवस्था की वापसी चाहने वालों की संख्या 62 फीसदी रही। विश्लेषकों ने कहा है कि इस रूझान से पश्चिमी व्यवस्था के समर्थक राहत महसूस कर सकते हैँ। इसका संकेत यह है कि आबादी में आज के बुजुर्गों की संख्या घटने के साथ पश्चिमी व्यवस्था के समर्थकों की संख्या समाज में बढ़ेगी।
कनाडा की यूनिवर्सटी ऑफ ओटावा में प्रोफेसर पॉल रॉबिनसन ने वेबसाइट रशिया टुडे से कहा कि जनमत सर्वे के ये नतीजे एक विडंबना की ओर इशारा करते हैँ। उन्होंने कहा कि आज जो लोग 55 साल से अधिक उम्र के हैं, तीन दशक पहले जब वे युवा थे, तब उनकी पीढ़ी ने ही सोवियत व्यवस्था को उखाड़ फेंका था। उस दौर में उदारवादी पार्टियों को खूब समर्थन मिला। लेकिन अब ऐसा लगता है कि इस पीढ़ी का उदारवाद से मोहभंग हो गया है।
रूसी विश्लेषकों का कहना है कि रूस में जो अनुभव रहा, ऐसा लगता है कि लोगों में उस कारण चुनावी लोकतंत्र से भरोसा घटा है। 1980 और 1990 के दशकों में जो पीढ़ी पश्चिम की तरफ ललचायी नजरों से देखती थी, उसे अब ऐसा लग रहा है कि पश्चिमी व्यवस्था में अनुकरण करने लायक कुछ नहीं है।