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Russia Ukraine War: क्या होता है संघर्ष विराम? रूस पर क्यों लगा यूक्रेन के मारियुपोल में इसे तोड़ने का आरोप?

Sat, 05 Mar 2022 06:43 PM IST
प्रतिभा ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

मारियुपोल में संघर्ष विराम की घोषणा के बाद शहर के डिप्टी मेयर सेरेई ओरलोफ ने कहा है कि आम लोगों को सुरक्षित कॉरिडोर से निकालने का काम रोक दिया गया है क्योंकि रूस लगातार बमबारी कर रहा है। लोगों को वापस अपनी जगहों पर भेजा जा रहा है।
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यूक्रेन से पलायन कर रहे लोगों के चेहरे पर चिंता के भाव की साफ झलक देखी जा सकती है। - फोटो : PTI
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विस्तार
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रूस ने यूक्रेन के दो शहरों मारियुपोल और वोल्नोवाखा से नागरिकों के निकलने के लिए संघर्ष विराम का एलान किया है और इसके लिए मानवीय कॉरिडोर शुरू किया है। रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि मानवीय कॉरिडोर खोले जाएंगे, इस दौरान लोग शहर छोड़कर जा सकेंगे। लेकिन यूक्रेन की मीडिया ने बड़ा आरोप लगाया है कि रूस ने युद्धविराम तोड़ दिया है और मारियूपोल में बमबारी हो रही है, जिस वजह से लोग निकल नहीं पा रहे हैं।
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यूक्रेन का आरोप है कि रूस सीजफायर की शर्तों का पालन नहीं कर रहा। मारियुपोल, यूक्रेन के सबसे बड़े बंदरगाह का शहर है जिसे रूसी सेना ने चारों तरफ से घेरा हुआ है।

लोगों को सुरक्षित निकालने का काम रोक दिया गया
मारियुपोल में संघर्ष विराम की घोषणा के बाद शहर के डिप्टी मेयर सेरेई ओरलोफ ने कहा है कि आम लोगों को सुरक्षित कॉरिडोर से निकालने का काम रोक दिया गया है और उन्हें वापस अपनी जगहों पर भेजा जा रहा है। जबकि रूस ने पहले कहा था कि उसकी सेना शनिवार को दो प्रमुख शहरों में शांत रहेगी ताकि लोग संघर्ष से बच सकें।
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डिप्टी मेयर सेरेई ओरलोफ ने मीडिया से कहा कि मारियुपोल में और ओरिखिएव के नजदीक लोगों को निकालने के रूट पर लगातार बमबारी जारी है जिस कारण यह फैसला लिया गया है। लोग बहुत डरे हुए हैं।

यूक्रेन से बड़ी संख्या में पलायन - फोटो : सोशल मीडिया
क्या होता है संघर्षविराम
संघर्षविराम (सीजफायर) को युद्धविराम भी कहा जाता है। ये किसी भी युद्ध को स्थाई या अस्थाई तौर पर रोकने का एक जरिया है। 

इसके तहत दोनों पक्ष सीमा पर किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई नहीं करने का वादा करते हैं। इसे दोनों देशों को बीच हुई औपचारिक संधि भी माना जा सकता है। 

हालांकि, सीजफायर के लिए औपचारिक संधि जरूरी नहीं है। कई बार दोनों देश आपसी सहमति से भी इसे लेकर फैसला ले लेते हैं।

अगर इस समझौते के बाद भी कोई एक पक्ष सीमा पर आक्रमक कार्रवाई करता है तो उसे सीजफायर का उल्लंघन कहा जाता है।


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पाकिस्तानी सेना (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media
पाकिस्तान पर भी लगा है सीजफायर के उल्लंघन का आरोप
सीजफायर के उल्लंघन का आरोप अक्सर पाकिस्तान पर भी लगता रहा है। आजादी के बाद साल 1947 में भारत और पाकिस्तान में कश्मीर के लिए युद्ध हुआ। इसे शांत कराने के लिए संयुक्त राष्ट्र को बीच में आना पड़ा था। इसके चलते साल 1949 में भारत और पाकिस्तान ने आपसी सहमति से जम्मू-कश्मीर पर एक सीजफायर लाइन स्थापित की। 

इसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने एक पत्र जारी किया जिसमें लिखा था कि ये सीजफायर भारत और पाकिस्तान के बीच दुश्मनी दूर करने का प्रतीक है। इसके बाद दोनों देशों के सैन्य प्रमुखों के बीच बैठक हुई, जिसमें सीजफायर लाइन पर सहमति जताई गई। लेकिन इसी साल 24 फरवरी को भारत-पाकिस्तान के डीजीएमओ स्तर पर संघर्षविराम समझौता हुआ था। जिसको ताक पर रखते हुए पाकिस्तान ने मई में नापाक हरकत की है और जवानों को निशाना बनाकर की गोलाबारी की।
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