रूस-यूक्रेन की जंग दसवें दिन में प्रवेश कर चुकी है। इस जंग में अब तक सैकड़ों सैनिकों की मौत हो चुकी है। वहीं कई बेगुनाह नागरिकों को भी अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है। रूस ने यूक्रेन के कई शहरों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है और इमारतें खंडहर में तब्दील हो गई हैं। हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस ने दो शहरों मारियुपोल और वोल्नोवाखा में अस्थायी सीजफायर का एलान कर दिया है। यूक्रेन में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए ऐसा किया गया है।
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हालांकि इससे पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने नाटो से यूक्रेन को नो-फ्लाई जोन घोषित करने की मांग की थी, ताकि यूक्रेन के ऊपर से कोई विमान उड़ान नहीं भर सकें। यूक्रेन के जपोरिजिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर रूस के हमले के बाद जेलेंस्की ने यूक्रेन ने नो-फ्लाई जोन घोषित करने के लिए नए सिरे से अपील की। लेकिन नाटो ने उनके इस अनुरोध को ठुकरा दिया।
नाटो महासचिव जेन्स स्टोल्टनबर्न ने नो-फ्लाई जोन की जेलेंस्की की मांग को सिरे से खारिज कर दिया। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा करने से यूरोप में रूस के साथ बड़े पैमाने पर जंग शुरू हो सकती है।
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नाटो के इस इनकार के बाद राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की भड़क गए हैं। उन्होंने शुक्रवार को हुए नाटो सम्मेलन को 'कमजोर' करार दिया। एक वीडियो संदेश में जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन में नो-फ्लाई जोन न लागू करके नाटो रूस को खुली छूट दे रहा है कि वह यूक्रेनी शहरों और गावों पर बम बरसाए।
रूस का विमान
- फोटो : ANI
क्या होता है नो-फ्लाई जोन? यूक्रेन क्यों कर रहा है इसकी मांग? आइए विस्तार से समझते हैं।
नो फ्लाई जोन क्या है?
नो फ्लाई जोन में किसी तरह के विमान के संचालन की इजाजत नहीं होती। नो-फ्लाई जोन उस क्षेत्र को कहा जाता है जहां किसी अनधिकृत विमान को उड़ने की इजाजत नहीं होती है।
आमतौर युद्ध या संकट के समय ऐसे जोन बनाए जाते हैं। सैन्य संदर्भ में नो-फ्लाई जोन को हमले के समय या युद्ध के समय विमान को प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से रोकने के लिए बनाया जाता है।
इसका उपयोग संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा के लिए भी किया जा सकता है जैसे कि शाही निवास। अस्थायी रूप से खेल आयोजनों और बड़े समारोहों की सुरक्षा के लिए भी ऐसा किया जा सकता है।
नो-फ्लाई जोन से क्या हासिल होगा?
इसे ऐसे समझिए कि अभी यूक्रेन में युद्ध चल रहा है और यदि इसे नो-फ्लाई जोन घोषित कर दिया जाता है तो सभी अनधिकृत विमानें जिसमें मुख्यतौर पर रूस की विमानें होंगी उसे यूक्रेन के ऊपर उड़ान भरने से रोक दिया जाएगा। यूक्रेनी अधिकारियों का कहना है कि नो-फ्लाई जोन रूसी हवाई हमलों से नागरिकों और परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की रक्षा करेगा।
नाटो
पहले ऐसा कब हुआ?
पश्चिमी देशों ने 1991 के खाड़ी युद्ध के बाद इराक के कई क्षेत्र को नो फ्लाई जोन घोषित किया गया।
इसी तरह 1993-95 में बोस्निया और हर्जेगोविना में गृहयुद्ध के दौरान भी ऐसा ही फैसला किया गया।
2011 में लीबिया के गृहयुद्ध के दौरान पश्चिमी देशों ने इराक के कुछ हिस्सों पर एक दशक से अधिक समय तक इस तरह के प्रतिबंध लगा दिए।
नाटो यूक्रेन में यह कदम क्यों नहीं उठाना चाहता?
यदि यूक्रेन को नो-फ्लाई जोन घोषित किया जाता है तो नाटो को मिशन का समर्थन करने के लिए ईंधन भरने वाले टैंकरों और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी विमानों को तैनात करना होगा।
नाटो पायलट इसके ऊपर से गुजरने वाले किसी भी रूसी विमान को गिराने के लिए मजबूर होंगे। सरल शब्दों में इसे समझा जाए तो नाटो का यह फैसला रूस को भड़का सकता है।
रूस इसे सीधे-सीधे नाटो का दखल मानेगा और यह यूक्रेन ही नहीं पूरे यूरोप में सैन्य संघर्ष का जोखिम बढ़ा सकता है, खासतौर पर परमाणु हमले का।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका,ब्रिटेन और उनके यूरोपीय सहयोगी यूक्रेन को नो-फ्लाई जोन घोषित करने से इसलिए बचना चाहते हैं क्योंकि यह युद्ध यूक्रेन से निकलकर तीसरे विश्वयुद्ध का बड़ा कारण बन सकता है। इससे यूक्रेन में नाटो और रूस के बीच परमाणु टकराव आसानी से बढ़ा सकता है।
नाटो के महासचिव जेन्स स्टोल्टेनबर्ग
- फोटो : twitter
नाटो ने क्या कहा?
नाटो के सचिव जेन्स स्टोलटेनबर्ग ने शुक्रवार को कहा ‘नो फ्लाई जोन को लागू करने का एकमात्र तरीका यही होगा नाटो लड़ाकू विमानों को यूक्रेनी हवाई क्षेत्र में भेजना होगा और फिर वे रूसी विमानों को मारकर वहां नो-फ्लाई जोन लागू करेंगे।
उन्होंने कहा कि ‘हम यूक्रेन की हताशा को समझते हैं, लेकिन हम यह भी मानते हैं कि अगर हमने ऐसा किया तो यह यूरोप में एक पूर्ण युद्ध में बदल सकता है।’
स्टोलटेनबर्ग ने कहा ‘इस युद्ध को यूक्रेन से आगे बढ़ने से रोकना नाटो सहयोगियों के रूप में हमारी जिम्मेदारी है।’
रूस से टकराना मुश्किल
लंदन में रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट के रिसर्च फेलो जस्टिन ब्रोंक के एक बयान के मुताबिक यूक्रेन वास्तव में नाटो का एक व्यापक हस्तक्षेप चाहते हैं, जैसा कि 2011 में लीबिया में हुआ था। लेकिन जब प्रतिद्वंद्वी रूस हो तो ऐसा होने की संभावना नहीं है।
ब्रिटेन के रक्षा सचिव बेन वालेस ने साफ कर दिया है कि ब्रिटेन यूक्रेन पर नो-फ्लाई जोन लागू करने में मदद नहीं करेगा क्योंकि रूसी विमानों से लड़ने से ‘पूरे यूरोप में युद्ध" शुरू हो जाएगा।