मानव विकास पर जारी संयुक्त राष्ट्र की एक नवीन रिपोर्ट में दावा किया गया है कि साल 2023 में वैश्विक मानव विकास अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, मगर उसके साथ ही संपन्न व वंचित समुदायों के बीच की खाई और गहरी हुई है। बताया गया है कि विषमतापूर्ण विकास के कारण सबसे निर्धन देश पीछे छूट रहे हैं, असमानताएं बढ़ रही हैं और राजनैतिक ध्रुवीकरण को हवा मिल रही है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारी आत्मनिर्भरता और क्षमताओं का लाभ उठाकर, साझा व अस्तित्व से जुड़ी चुनौतियों से निपटना होगा, ताकि लोगों की आकांक्षाओं को पूरा किया जा सके।
लोकतंत्र व्यवस्था के लिए एक विरोधाभास भी नजर आया
यूएन विकास कार्यक्रम की रिपोर्ट में लोकतंत्र व्यवस्था के लिए एक विरोधाभास उभरता भी नजर आया है। सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाले 90 प्रतिशत प्रतिभागियों ने लोकतंत्र के लिए समर्थन व्यक्त किया, मगर साथ ही उन नेताओं का भी पक्ष लिया, जिनसे लोकतांत्रिक सिद्धान्त कमजोर हो सकते हैं।
रिपोर्ट बताती है कि इस विरोधाभास, शक्तिहीनता के एहसास और सरकारी निर्णयों पर कोई नियंत्रण ना होने की वजह से, राजनैतिक ध्रुवीकरण को बल मिला है और आत्म-केन्द्रित नीतिगत तौर-तरीके अपनाए जा रहे हैं। बढ़ते जलवायु संकट, कृत्रिम बुद्धिमता और नई उभरती हुई टैक्नॉलॉजी समेत अन्य वैश्विक चुनौतियों की पृष्ठभूमि में एकजुट कार्रवाई के रास्ते में यह बाधक है।
कुछ जरूरी निष्कर्ष
2020 और 2021 में अपने एचडीआई में गिरावट दर्ज करने वाले 35 सबसे कम विकसित देशों में से 18 देश अभी 2019 के स्तर पर नहीं लौट पाए हैं।
सभी विकासशील क्षेत्र 2019 से पहले के एचडीआई रुझानों के अनुसार अपनी सम्भावनाओं को पूरा नहीं कर पाए हैं। भविष्य में भी उनकी विकास प्रक्रिया को झटका लगने का खतरा है।
मानव विकास प्रक्रिया को सबसे अधिक हानि अफगानिस्तान व यूक्रेन में हुई है। अफगानिस्तान में एचडीआई 10 वर्ष पहले के स्तर पर पहुंच गया है, जबकि यूक्रेन में यह 2004 के बाद से अपने निम्नतम स्तर पर है।
लोकप्रियवादी सरकारों वाले देशों में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर अपेक्षाकृत कम रहने के रुझान मिले हैं।