पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के पहले सिख मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा ने कहा है कि प्रांतीय सिख अधिनियम में संशोधन होंगे, जिसके तहत 18 साल से कम उम्र के सिख शादी करने के लिए अयोग्य होंगे। संशोधित कानून के मुताबिक, विवाह गुरु ग्रंथ साहिब की शिक्षाओं के अनुसार होगा। जोड़े को एक फॉर्म भरना होगा और शादी के 30 दिनों के भीतर अधिकृत रजिस्ट्रार को जमा करना होगा।
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के पहले सिख मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा ने कहा है कि प्रांतीय सिख अधिनियम में संशोधन होंगे, जिसके तहत 18 साल से कम उम्र के सिख शादी करने के लिए अयोग्य होंगे। बुधवार को पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (पीएसजीपीसी) की एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए रमेश सिं अरोड़ा ने कहा कि पाकिस्तान के सिख अधिनियम में नए संशोधन अल्पसंख्यक समुदाय के पक्ष में होने जा रहे हैं।
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सिख एक्ट में कई संशोधनों की सिफारिश- रमेश सिंह अरोड़ा
अल्पसंख्यक मामलों के प्रांतीय कैबिनेट मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा ने कहा कि सिख आनंद विवाह अधिनियम 2018 में 18 वर्ष से कम उम्र के सिखों को विवाह के लिए अयोग्य बनाने समेत कुछ संशोधन किए जाएंगे और इसे जल्द ही कैबिनेट द्वारा मंजूरी दे दी जाएगी। बैठक में लाहौर, ननकाना साहिब, पांजा साहिब, डेरा साहिब और पेशावर से हेड ग्रांटी भी शामिल हुए। बैठक के दौरान सिख एक्ट में कई संशोधनों की सिफारिश की गई।
'शादी के 30 दिनों के अंदर रजिस्टार को जमा करना होगा फार्म'
संशोधित कानून के मुताबिक, विवाह गुरु ग्रंथ साहिब की शिक्षाओं के अनुसार होगा। जोड़े को एक फॉर्म भरना होगा और शादी के 30 दिनों के भीतर अधिकृत रजिस्ट्रार को जमा करना होगा। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) पार्टी के सदस्य रमेश सिंह अरोड़ा ने कहा कि यूनियन काउंसिल सभी विवाहों का रिकॉर्ड रखेगी। बैठक के दौरान सुलह परिषद, विवाह रजिस्ट्रार और रजिस्ट्रार की नियुक्ति के संबंध में विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा की गई।
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सिख विवाह के लिए उम्र 18 वर्ष करने की तैयारी- अरोड़ा
बैठक के नतीजे के मुताबिक, विवाह के लिए सिख लड़के और लड़कियों की उम्र 18 वर्ष होनी चाहिए। इस दौरान इस बात पर भी सहमति बनी कि पांच सदस्यीय संगत किसी भी मुद्दे पर अपने प्रस्ताव पेश करेगी। यह भी निर्णय लिया गया कि तलाक चाहने वाले जोड़े को यूनियन काउंसिल के अध्यक्ष को एक लिखित नोटिस भेजने के लिए बाध्य किया जाएगा, जो नोटिस प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर एक सुलह समिति का गठन करेगा। यदि जोड़ा 90 दिनों के बाद मेल-मिलाप करने में विफल रहता है, तो एक प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।