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मोदी की अमेरिका यात्रा: जानिए इस दौरे से भारत को क्या हासिल हुआ, इन पांच बिंदुओं में समझिए

प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Sat, 25 Sep 2021 05:57 PM IST

सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिवसीय अमेरिकी दौरे पर हैं। पीएम ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से मुलाकात की। अमेरिका की पहली महिला उप राष्ट्रपति कमला हैरिस से भी उनकी मुलाकात हई। क्या है इस यात्रा के मायने और भारत को इससे क्या लाभ मिला है....
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के बीच बातचीत के दौरान हंसी-मजाक भी हुआ। - फोटो : Twitter/MEA
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 सितंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन और जापान के प्रधानमंत्री योशीहिदे सुगा के साथ पहली बार व्यक्तिगत रूप से क्वाड शिखर सम्मेलन में भाग लिया। अमेरिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जोर-दार स्वागत हुआ। माना जा रहा है कि अपनी इस अमेरिकी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व के कई नेताओं और कॉर्पोरेट जगत के बड़े लोगों के साथ बैठक करके भारत को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अग्रणी पंक्ति में खड़ा कर दिया है। क्या है इस यात्रा के मायने और इसे हम कितना सफल मानें? हमने पूर्व राजनयिक जी पार्थसार्थी, विदेश मामलों के विशेषज्ञ सुशांत सरीन और अमेरिका में भारत के वरिष्ठ पत्रकार ललित झा के जरिए यह समझने की कोशिश की है कि मोदी के इस यात्रा से भारत को क्या लाभ मिला है। पांच बिंदुओं में समझिए यह पूरी बात। 

1-बाइडन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद  में भारत की स्थायी सदस्यता, एनएसजी में प्रवेश के समर्थन को दोहराया
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने व्हाइट हाउस में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी पहली व्यक्तिगत द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अमेरिका के समर्थन को दोहराया है। बाइडेन के समर्थन से भारत के प्रयासों को प्रोत्साहन मिला है जो स्थायी सदस्य के रूप में संयुक्त राष्ट्र के इस उच्च और महत्वपूर्ण अंग में स्थान पाने का हकदार है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने जानकारी साझा करने और उन्नत सैन्य प्रौद्योगिकियों में सहयोग को मजबूत करने कई ऐसी बातें कही है जिससे उन्होंने भारत को  एक प्रमुख रक्षा भागीदार माना है।



2- चीन का नाम लिए बिना सुरक्षा के मामले पर एक दूसरे का सहयोग मिलेगा
पूर्व राजनयिक जी पार्थसारथी कहते हैं भारत ने क्वाड सम्मेलन में यह साफ कर दिया है कि वह मानवता के विकास के लिए और सुरक्षा में पूर्ण सहयोग देगा। इस तरह अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने भी सुरक्षा के लिए एक-दूसरे के साथ मिलकर कदम उठाने की बात कही है। अप्रत्यक्ष तौर पर यह साफ है कि चीन का नाम लिए बिना जिस तरह सुरक्षा में सहयोग करने की बात हुई है उससे पश्चिमी देशों के साथ भारत के रिश्ते मजबूत होंगे। ललित झा के मुताबिक कहा जा रहा है कि  क्वाड चीन के खिलाफ बनाया गया एक समूह है लेकिन यह चीन का फैलाया हुआ प्रोपेगेंडा ज्यादा लगता है। क्वाड देशों ने कभी भी चीन का नाम नहीं लिया है, लेकिन इतना जरूर है कि क्वाड में शामिल होना भारत के लिए हर लिहाज से बेहतर है।


पार्थसारथी कहते हैं क्वाड समूह के संयुक्त बयान को देखें तो इसमें यह बात कही गई है कि महामारी का सामना करने और विकास के भी लिए भी ये चारों देश एक-दूसरे को सहयोग करेंगे। तो इसका मतलब है कि भारत विकास के लिए यदि इन देशों के साथ मिलकर काम करता है तो आने वाले सालों में इसके बेहतर नतीजे देखने को मिलेंगे। 
 
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के बीच बातचीत के दौरान हंसी-मजाक भी हुआ। - फोटो : Twitter/MEA
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 सितंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन और जापान के प्रधानमंत्री योशीहिदे सुगा के साथ पहली बार व्यक्तिगत रूप से क्वाड शिखर सम्मेलन में भाग लिया। अमेरिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जोर-दार स्वागत हुआ। माना जा रहा है कि अपनी इस अमेरिकी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व के कई नेताओं और कॉर्पोरेट जगत के बड़े लोगों के साथ बैठक करके भारत को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अग्रणी पंक्ति में खड़ा कर दिया है। क्या है इस यात्रा के मायने और इसे हम कितना सफल मानें? हमने पूर्व राजनयिक जी पार्थसार्थी, विदेश मामलों के विशेषज्ञ सुशांत सरीन और अमेरिका में भारत के वरिष्ठ पत्रकार ललित झा के जरिए यह समझने की कोशिश की है कि मोदी के इस यात्रा से भारत को क्या लाभ मिला है। पांच बिंदुओं में समझिए यह पूरी बात। 

1-बाइडन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद  में भारत की स्थायी सदस्यता, एनएसजी में प्रवेश के समर्थन को दोहराया
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने व्हाइट हाउस में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी पहली व्यक्तिगत द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अमेरिका के समर्थन को दोहराया है। बाइडेन के समर्थन से भारत के प्रयासों को प्रोत्साहन मिला है जो स्थायी सदस्य के रूप में संयुक्त राष्ट्र के इस उच्च और महत्वपूर्ण अंग में स्थान पाने का हकदार है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने जानकारी साझा करने और उन्नत सैन्य प्रौद्योगिकियों में सहयोग को मजबूत करने कई ऐसी बातें कही है जिससे उन्होंने भारत को  एक प्रमुख रक्षा भागीदार माना है।


2- चीन का नाम लिए बिना सुरक्षा के मामले पर एक दूसरे का सहयोग मिलेगा
पूर्व राजनयिक जी पार्थसारथी कहते हैं भारत ने क्वाड सम्मेलन में यह साफ कर दिया है कि वह मानवता के विकास के लिए और सुरक्षा में पूर्ण सहयोग देगा। इस तरह अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने भी सुरक्षा के लिए एक-दूसरे के साथ मिलकर कदम उठाने की बात कही है। अप्रत्यक्ष तौर पर यह साफ है कि चीन का नाम लिए बिना जिस तरह सुरक्षा में सहयोग करने की बात हुई है उससे पश्चिमी देशों के साथ भारत के रिश्ते मजबूत होंगे। ललित झा के मुताबिक कहा जा रहा है कि  क्वाड चीन के खिलाफ बनाया गया एक समूह है लेकिन यह चीन का फैलाया हुआ प्रोपेगेंडा ज्यादा लगता है। क्वाड देशों ने कभी भी चीन का नाम नहीं लिया है, लेकिन इतना जरूर है कि क्वाड में शामिल होना भारत के लिए हर लिहाज से बेहतर है।


पार्थसारथी कहते हैं क्वाड समूह के संयुक्त बयान को देखें तो इसमें यह बात कही गई है कि महामारी का सामना करने और विकास के भी लिए भी ये चारों देश एक-दूसरे को सहयोग करेंगे। तो इसका मतलब है कि भारत विकास के लिए यदि इन देशों के साथ मिलकर काम करता है तो आने वाले सालों में इसके बेहतर नतीजे देखने को मिलेंगे। 
 

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का व्हाइट हाउस में गर्मजोशी से स्वागत किया। - फोटो : Twitter/MEA
3-अमेरिका के साथ भारत के रिश्ते बेहतरी की ओर जा रहे
ललित झा मानते हैं भारत का क्वाड का सदस्य बनना और अमेरिका का भारत को अहमियत देना कूटनीतिक दृष्टि से भारत के लिए बहुत अहम  है क्योंकि वह दुनिया की बड़ी शक्तियों का हिस्सा बना है। भारत इसलिए इस में शामिल किया गया है क्योंकि वह एक आर्थिक महाशक्ति के तौर पर उभर रहा है। रक्षा और तकनीक के मामले में क्वाड देशों के बीच का सहयोग भारत के लिए कई अवसर पैदा करने वाला है।

वहीं सुशांत सरीन की राय है कि भारत और अमेरिका के बीच के रिश्ते बेहतरी की तरफ जा रहे हैं। दोनों देशों के बीच के रिश्ते को लेकर जो हाल में दुष्प्रचार हुआ था उसका असर नहीं हुआ।  अमेरिका के भारत के साथ ज्यादातर मुद्दों पर सहमति है। चाहे आतंकवाद का मुद्दा हो या तकनीक का। हो सकता है कि दोनों देशों की कुछ उम्मीदों पर नहीं उतरे हों, लेकिन यदि आप इस बात को नजरअंदाज कर दें तो समझेंगे कि भारत ने भविष्य के लिए क्वाड समूह देशों के साथ-साथ अमेरिका के साथ खासतौर पर सहयोग और सामंजस्य की नींव रखी है।

उनका कहना है, हां यदि कुछ लोग ऐसा सोचते हों कि अमेरिका ने ऑस्ट्रेलिया के साथ न्यूक्लियर पनडुब्बी का करार कर लिया है तो भारत के साथ क्यों नहीं किया तो यह समझने की बात है कि यह करार ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका के बीच का त्रिपक्षीय सुरक्षा समझौते जिसे 'ऑकस' नाम दिया गया है उसके तहत हुआ है और भारत उसका सदस्य नहीं है। अमेरिका से यदि इस तरह के उच्च तकनीक को पाने की अपेक्षा करते हैं तो क्या हम वे पूरा कर पाएंगे जिसकी अपेक्षा अमेरिका हम से रखेगा। इसलिए विषय को हर दृष्टिकोण से समझने की जरूरत है। 

वैक्सीन का मैन्युफैक्चरिंग हब बन सकता है भारत
अमेरिका और भारत के रिश्ते में ललित झा  एक नया चैप्टर जुड़ते हुए देखते हैं। उनका कहना है दोनों देश नए क्षेत्र पर मिलने कर काम करन के लिए सहमत हुए हैं। ग्लोबल गुड जिसमें क्लाइमेट चेंज और हेल्थ महत्वपूर्ण मुद्दे हैं इस पर दोनों पुराने लोकतांत्रिक देश एक साथ आए हैं। क्लाइमेट चेंज को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने कई कदम उठाए हैं जो इस धरती को लोगों के लिए रहने लायक बनाएगा। इसी तरह की प्राथमिकता बाइडन की भी है। दोनों देश सिर्फ अपने देश के लोगों की कल्याण की बात नहीं सोचते हैं बल्कि दुनिया के लिए कोरोना वैक्सीन को लेकर भी आगे आने को तैयार है। मेरा मानना है कि आने वाले दिनों में भारत वैक्सीन का मैन्युफैक्चरिंग हब बन सकता है। इससे लोगों को सस्ता और अच्छी क्ववालिटी का वैक्सीन मिलेगा। इसलिए ग्लोबल गुड के मामले में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका होने वाली है।  

4-पाकिस्तान अलग-थलग पड़ गया
क्वाड समूहों के देशों के इस शिखर सम्मेलन से पाकिस्तान पूरी तरह अलग-थलग पड़ गया है। जी पार्थसारथी कहते हैं कि कश्मीर पर उसके राग अलापने का भी कोई फायदा नहीं है, क्योंकि पूरी दुनिया समझ गई है कि इमरान खान के पास इसके अलावा कोई एजेंडा नहीं है। पाकिस्तान ने कश्मीर पर जो बात की है उससे जाहिर होता है कि इमरान खान की सोच अभी तक क्या है। पाकिस्तान ने भारत का विरोध करने की कोशिश की लेकिन वह सफल नहीं हुआ। 

 

अमेरिका में पीएम मोदी के कार्यक्रम के लिए लगी होर्डिंग - फोटो : Social Media
सरीन कहते हैं कई इस्लामिक देशों के साथ पाकिस्तान अपना समन्वय बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन पश्चिमी देशों के साथ पाकिस्तान की उस तरह की नजदीकियां नहीं रही हैं खासतौर से अमेरिका के साथ। अमेरिका से उसके रिश्ते बिगड़ रहे हैं जबकि भारत अमेरिका के करीब जा रहा है। पाकिस्तान को अलग-थलग करने की भारत की रणनीति कामयाब रही है। 

भारत और अमेरिका ने कहा है कि वे संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित समूहों सहित सभी आतंकवादी समूहों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करेंगे। दोनों देशों ने  सीमा पार आतंकवाद की निंदा की और 26/11 के मुंबई हमलों के अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाने की भी बात कही है। इससे जाहिर होता है कि सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर अमेरिका भारत के साथ है। ललित झा के मुताबिक क्वाड के संयुक्त बयान में अफगानिस्तान पर भारत के रूख का समर्थन किया गया है। आतंकवाद के मुद्दे पर चार बड़ी शक्तियां एक साथ आए हैं। यह पाकिस्तान के लिए एक चेतावनी की तरह है कि यदि वह आतंकवाद पर अपना रवैया नहीं बदलता है तो उस पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है। 
 

5-मोदी का जोरदार स्वागत
सबकी निगाहें इस बात पर लगी थीं कि अमेरिका में सरकार बदल जाने के बाद  न जाने मोदी का कैसा स्वागत कैसे होगा? क्योंकि मोदी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हाउडी मोदी कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। कुछ राजनयिक मान रह थे कि इस वजह मोदी और बाइडन के रिश्ते खराब हो जाएंगे लेकिन बाइडन के साथ भी उनके रिश्ते बने हुए हैं।

दो साल बाद व्हाइट हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उसी गर्मजोशी के साथ स्वागत हुआ है। इससे साफ होता है कि अमेरिका भारतीय लोकतंत्र की ताकत को बखूबी महसूस करता है। सरीन का मानना है कि हाउडी मोदी कार्यक्रम पीएम मोदी के लिए था। यदि उसमें ट्रंम्प शामिल होना चाहते थे तो क्या किया जा सकता है। इसका बाइडन और मोदी के रिश्ते से कोई लेना-देना नहीं है।  

इमरान की तुलना मोदी से हो जाती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संयुक्त राष्ट्र महासभा को पहले भी कई बार संबोधित कर चुके हैं लेकिन क्वाड सम्मेलन के संदर्भ में इसका महत्व बढ़ गया है। सरीन कहते हैं एक तरफ नौ महीने हो गए लेकिन इमरान खान और जो बाइडन की अभी तक बात ही नहीं हुई है। जबकि नरेंद्र मोदी उनके साथ वर्चुअली ही सही लेकिन पहले ही क्वाड सम्मेलन में शिरकत कर चुके हैं। पहले फोन पर भी उनकी बात हो चुकी है। पीएम मोदी को इस बार भी संयुक्त राष्ट्र महासभा में बोलने का मौका मिला लेकिन इमरान खान वर्चुअली ही इसमें शामिल हुए। यदि वे अमेरिका जाते और बाइडन से उनकी मुलाकात नहीं हो पाती तो अंततराष्ट्रीय स्तर पर उनकी किरकिरी तो होती ही उनकी तुलना मोदी के साथ भी की जाती। इसलिए उन्होंने अमेरिका नहीं जाने का सही फैसला किया।

मोदी ने इससे पहले 2019 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र संबोधित किया था। पिछले साल, दुनिया के सभी नेताओं ने सितंबर में सत्र के लिए पहले से रिकॉर्ड किए गए वीडियो स्टेटमेंट दिए थे, क्योंकि कोरोना के कारण वार्षिक सभा में शारीरिक रूप से शामिल होने के लिए यात्रा नहीं कर सकते थे। 

 
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