पीएम ने कहा, "रैडिकलाइजेशन से लड़ाई, क्षेत्रीय सुरक्षा और आपसी हितों के लिए आवश्यक है। ये हमारे युवाओं के लिए भी जरूरी है। हमें अपने प्रतिभाशाली युवाओं को तर्कसंगत सोच की ओर आगे बढ़ाना होगा। हमें एससीओ पार्टनर्स के साथ एक ओपन सोर्स तकनीक को शेयर करने में और कैपसिटी बिल्डिंग आयोजित करने में खुशी होगी। कट्टरपंथ और असुरक्षा के कारण इस क्षेत्र की आर्थिक क्षमता भी अनछुई रह गई है। खनिज संपदा हो या और कुछ हमें बढ़ती कनेक्टिविटी पर ध्यान देना होगा। मध्य एशिया हमेशा से कनेक्टिविटी के लिए लोकप्रिय रहा है। भारत मध्य एशिया के साथ कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा मानना है कि चारों तरफ जमीन से घिरे मध्य एशियाई देशों को भारत के विशाल बाज़ार से जुड़ कर अपार लाभ हो सकता है।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि कनेक्टिविटी की कोई भी पहल वन-वे नहीं हो सकती। इन प्रोजेक्ट्स को पारदर्शी और पार्टिसिपटेरी होना चाहिए। इनमें सभी देशों की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए। एससीओ के इसके लिए उपयुक्त नियम बनाने चाहिए। कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स तभी हमें जोड़ने का काम करेंगे, न कि दूरी बढ़ाने का। इसके लिए भारत अपनी तरफ से हर कोशिश के लिए तैयार है।
एससीओ-सीएसटीओ आउटरीच शिखर सम्मेलन में शुक्रवार शाम पीएम मोदी ने कहा, 'अगर अफगानिस्तान में अस्थिरता और कट्टरता बनी रहेगी तो इससे पूरे विश्व में आतंकवादी और उग्रवादी विचारधाराओं को बढ़ावा मिलेगा। ऐसे में अन्य उग्रवादी समूहों को हिंसा के माध्यम से सत्ता पाने का प्रोत्साहन भी मिल सकता है।'
आतंकवाद फैलाने के लिए न हो अफगान धरती का उपयोग
पीएम मोदी ने कहा कि सभी देश पहले भी आतंकवाद से पीड़ित रहे हैं इसलिए हमें मिलकर सुनिश्चित करना चाहिए कि अफगानिस्तान की धरती का उपयोग किसी भी देश में आतंकवाद फैलाने के लिए न हो। एससीओ को सदस्य देशों को इस विषय पर सख्त और साझा मानदंड विकसित करने चाहिए। ये मानदंड आगे चलकर वैश्विक आतंक रोधी सहयोग के लिए भी एक टेंपलेट बन सकते हैं। ये मानदंड आतंकवाद के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस के सिद्धांत पर आधारित होने चाहिए। इनमें सीमा पार आतंकवाद और आतंकी वित्त पोषण जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए एक आचार संहिता होना चाहिए।
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत अफगानिस्तान के विकास व मानवीय मदद का भरोसेमंद साझेदार रहा है। हमने वहां हर क्षेत्र- इंफ्रास्ट्र्क्चर, शिक्षा, स्वास्थ्य व क्षमता संवर्धन के क्षेत्र में सहयोग किया है। आज भी हम हमारे अफगानी मित्रों को खाद्य सामग्री व दवाएं आदि भेजने को तैयार हैं।