पंडोरा पेपर्स में ऐसे 14 फाइनेंशियल सर्विस प्रदाताओं का जिक्र है, जो इस तरह की सेवा दे रहे हैं। ये सर्विस प्रोवाइडर बेलिजे, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स, सिंगापुर, साइप्रस और स्विट्जरलैंड में गोपनीय ट्रस्ट या फर्जी कंपनी बनवाने की सेवाएं देते हैं। पहले इन जगहों को ऑफशोर सेंटर कहा जाता था। अब अमेरिका के साउथ डकोटा, डेलावेयर और दो अन्य राज्यों में भी ऐसी सेवा उपलब्ध हो गई है। जहां इस तरह के ट्रस्ट या कंपनियों को रजिस्टर करवाने की सुविधा है, उन्हें ऑफशोर सेंटर या टैक्स हैवेन कहा जाता है।
पंडोरा पेपर्स के मुताबिक ऑफशोर सेंटरों पर गोपनीय ट्रस्ट या कंपनी बनाना वहां के कानून के अनुरूप होता है। इसके बावजूद कई लोगों और कंपनियों ने जिस तरह से ऑफशोर सेवाओं का उपयोग किया है, वह कानूनी नहीं है। वैसे जिन देशों से धन लाया जाता है, वहां के कानून की आंख में धूल झोंकते हुए ही ऐसा किया जाता है।
जिन अखबारों ने पंडोरा पेपर्स से जुड़ी रिपोर्टों को छापा है, उनमें अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट भी है। पोस्ट की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन देशों में कमाया जाता है और जिनका उस पर वैध अधिकार है, ऑफशोर सिस्टम के कारण उससे वे देश वंचित हो जाते हैं। इससे उन देशों में गरीबी और गैर-बराबरी बढ़ती है। पंडोरा पेपर्स से जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनमें 130 से ज्यादा ऐसे हैं, जो फॉर्ब्स मैग्जीन की अरबपतियों की सूची में शामिल हैं।