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तालिबान प्रेम: पाक पीएम ने फिर से की तालिबान की पैरवी, कहा- अमेरिका आज नहीं तो कल मान्यता देगा

Sun, 03 Oct 2021 06:39 PM IST
सुभाष कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

इमरान ने कहा कि अमेरिका को आज नहीं तो कल तालिबान को मान्यता देनी ही पड़ेगी। अमेरिका अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद सदमे और भ्रम की स्थिति में है।
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पाक पीएम ने कहा अमेरिका आज नहीं तो कल मान्यता देगा। - फोटो : social media
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विस्तार
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पाकिस्तानी पीएम इमरान ने एक बार फिर से दुनिया के सामने अपने तालिबान प्रेम को जाहिर कर दिया है। इमरान पिछले काफी समय से पूरी दुनिया में तालिबान की वकालत करते हुए घूम रहे हैं। तुर्की के न्यूज चैनल टीआरटी वर्ल्ड को दिए एक इंटरव्यू में इमरान खान ने फिर से तालिबान का समर्थन किया। 
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इमरान ने कहा कि अमेरिका को आज नहीं तो कल तालिबान को मान्यता देनी ही पड़ेगी, अमेरिका अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद सदमे और भ्रम की स्थिति में है। दरअसल, बीते 15 अगस्त को तालिबान द्वारा काबुल पर नियंत्रण लेते ही पूरे अगानिस्तान पर आतंकी संगठन तालिबान का कब्जा हो गया था। 

बाइडन का किया समर्थन
इमरान खान ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि अमेरिका की जनता वर्तमान समय में इस पूरे मुद्दे को लेकर एक बलि का बकरा ढ़ूंढ़ रही है।उन्होनें अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का समर्थन करते हुए कहा कि बाइडन को जानबूझ कर निशाना बनाया जा रहा है। बता दें कि अमेरिकी सैनिकों के अफगानिस्तान से निकलते ही वहां अशरफ गनी की सरकार और सेना तालिबान के हाथों हार गई थी। राष्ट्रपति बाइडन के विरोधियों का कहना है कि अफगानिस्तान में जारी हिंसा और सैनिकों को रोकने के बढ़ते दवाब के बावजूद भी बाइडन ने सैनिकों को वापस बुलाया था।
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इमरान खान ने अफगानिस्तान को फंड जारी करने पर भी जोर देते हुए कहा कि अगर अमेरिका ने अफगानिस्तान को फिर से फंड नहीं जारी किया तो देश में अराजक स्थिती पैदा हो सकती है। भविष्य में अमेरिका को ही इसका समाधान निकालना होगा। 

तालिबान को पाकिस्तान के मान्यता देने पर भी बोलें 
इमरान ने पाकिस्तान द्वारा तालिबान को मान्यता दिए जाने के सवाल पर कहा कि इस मामले में केवल पाकिस्तान के मान्यता देने भर से कोई खास असर नहीं पड़ेगा। सभी पड़ोसी देशों और क्षेत्र की अन्य ताकतों को मिलकर तालिबान को मान्यता देनी होगी। तभी इस मामले का रोई समाधान निकलेगा। पाकिस्तानी पीएम ने बताया कि वो अफगानिस्तान में सैन्य विरोधी समाधान के पक्षधर हैं।
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