भारत ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के उस दावे पर सवाल उठाए हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि कश्मीर मसले पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से जुड़े 58 देश उनके साथ हैं।
चलिए आपको बताते हैं कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में कितने सदस्य देश हैं, यह कैसे काम करता है और इसकी संरचना क्या है। दूसरे विश्व युद्ध के बाद जब 1945 में संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना हुई थी तभी युद्ध में मची तबाही को देखते हुए मानवाधिकारों के संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए मानवाधिकार काउंसिल भी स्थापित किया गया था।
इसे संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग के विकल्प के तौर पर बनाया गया था। इसका मक़सद दुनिया भर में मानवाधिकार के मुद्दों पर नजर रखना है। यूएनएचसी ने उत्तर कोरिया, सीरिया, म्यांमार और दक्षिणी सूडान जैसे देशों में अहम भूमिकाएं निभाई है।
वहीं साल 2013 में चीन, रूस, सऊदी अरब, अल्जीरिया और वियतनाम को यूएनएचसी का सदस्य चुने जाने पर दूसरे मानवाधिकार समूहों ने इसकी आलोचना की थी।
इस मामले में भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार की बात सही है। वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में 47 सदस्य देश हैं, जो संयुक्त राष्ट्र की महासभा के सदस्यों के प्रत्यक्ष और गुप्त मतदान के जरिए चुने जाते हैं।
परिषद के सदस्य तीन साल के लिए चुने जाते हैं। लगातार दो कार्यकाल के लिए चुने जाने के बाद, उन्हें लगातार तीसरी बार सदस्य नहीं चुना जा सका। लिहाजा एक देश अधिकतम लगातार छह साल के लिए इस काउंसिल का सदस्य बना रह सकता है।
जहां पाकिस्तान तीन सालों के लिए 2018 में मानवाधिकार परिषद का सदस्य बना, वहीं भारत इसी वर्ष सदस्य चुना गया है। इस परिषद में सदस्य भौगोलिक आधार पर विभिन्न महादेशों से देश चुने जाते हैं।
अफ़्रीका से मानवाधिकार परिषद में 13 सदस्य हैं। वर्तमान में ये सदस्य देश हैं- बुर्किना फासो, कैमरून, इरिट्रिया, सोमालिया, टोगा, अंगोला, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो, नाइजीरिया, सेनेगल, मिस्र, रवांडा, ट्यूनिशिया और दक्षिण अफ़्रीका।
एशिया-प्रशांत क्षेत्र से इस काउंसिल में 13 देश हैं। ये हैं- भारत, बहरीन, बांग्लादेश, फिजी, फिलिपींस, अफगानिस्तान, नेपाल, कतर, पाकिस्तान, चीन, इराक, जापान और सऊदी अरब। वहीं लैटिन अमरीका और कैरिबियाई देशों की संख्या आठ है, जो बुल्गारिया, चेक रिपब्लिक, स्लोवाकिया, यूक्रेन, क्रोएशिया और हंगरी हैं।
पश्चिम यूरोप से सात सदस्य देश हैं। अर्जेंटीना, बहामास, उरुग्वे, चिली, मैक्सिको, पेरू, ब्राजील और क्यूबा। तो पूर्वी यूरोप के छह देश शामिल हैं। ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, इटली, ऑस्ट्रेलिया, स्पेन, ब्रिटेन और आइसलैंड। अमरीका 2017 में मानवाधिकार परिषद का सदस्य चुना गया था लेकिन जून 2018 में वह परिषद पर 'राजनीतिक पक्षपात' से प्रेरित बताते हुए इससे हट गया था।