गौरतलब है कि पाकिस्तान की बहुत बड़ी सीमा अफगानिस्तान से लगी है और दोनों मुल्कों के बीच रिश्ते कभी मधुर तो कभी तल्ख रहे हैं। लेकिन जब से तालिबान की सरकार बनी है, पाकिस्तान ने इसमें अहम भूमिका निभाई है। वह लगातार अफगान तालिबान को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने में लगा है। कुरैशी ने अमेरिका, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक से अपील की है कि वह तालिबान सरकार को मदद देने को लेकर लगाई गई पाबंदियों को खत्म करे और वहां की सरकार को अफगानिस्तान की जनता के लिए काम करने में मदद करे। वहां एक लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से सरकार चलाने की दिशा में सभी को प्रयास करने होंगे।
पाकिस्तान बार-बार तालिबान सरकार को ये भी नसीहत दे रहा है कि वह अपनी सरकार में सभी कबीलों को उचित जगह दे। उज्बेक, ताजिक और हाजरा समुदायों को उचित प्रतिनिधित्व दे, महिलाओं को सम्मानजनक दर्जा दे। जाहिर है जबतक तालिबान ऐसा नहीं करेगा, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उसे अलग-थलग रखा जाएगा। इसी स्थिति को बदलने के लिए पाकिस्तान ने पूरी ताकत लगा रखी है। वह खुलकर अपने इस पड़ोसी देश को हर संभव मदद का भरोसा दिला रहा है और दुनिया को ये नसीहत देने की कोशिश कर रहा है कि उसे तालिबान सरकार के वजूद को मान लेना चाहिए।