जून 2023 में लापता हो गए थे आजम खान
मामले पर उच्च न्यायालय (आईएचसी) के मुख्य न्यायाधीश आमिर फारूक और न्यायमूर्ति मियांगल हसन औरंगजेब की खंडपीठ मंगलवार को सुनवाई कर रही थी। इमरान के वकील सलमान सफदर ने दलील दी कि आरोपी आजम खान जून 2023 में लापता हो गए थे। तब इमरान के पूर्व प्रमुख सचिव ने अपना इकबालिया बयान (कबूलनामा) दर्ज करने के बजाय एक जांच अधिकारी और मजिस्ट्रेट के सामने उनके खिलाफ गवाही दी। आजम खान खान कभी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के संस्थापक करीबी रहे थे।
इमरान और कुरैशी को ठहराया गया था दोषी
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उच्च न्यायालय इमरान खान और पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी की उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जो राष्ट्र हितों को नुकसान पहुंचने के लिए एक गोपनीय राजनयिक पत्र के दुरुपयोग के लिए उन्हें दोषी ठहराए जाने के खिलाफ दायर की गईं थीं। दोनों नेताओं को सरकारी गोपनीयता अधिनियम, 1923 के तहत दोषी ठहराया गया था।
इमरान ने रैली में लहराया था कागज का टुकड़ा
अप्रैल 2022 में अविश्वास मत के जरिए पीटीआई की सरकार हटाई गई थी। इससे ठीक दो हफ्ते पहले इमरान खान ने इस्लामाबाद में एक सार्वजनिक रैली में एक कागज का टुकड़ा लहराते हुए कहा था कि विदेशी ताकतें उनके सरकार को गिराने की साजिश रच रही हैं। यह उसका सबूत है। यह कागज का टुकड़ा कथित तौर पर गोपनीय राजनयिक पत्र की एक प्रति थी।
संदिग्ध परिस्थिति में दर्ज की गई आजम की गवाही
सफदर ने कहा, मामले में प्राथमिकी पिछले साल 15 अगस्त को दर्ज की गई थी। इमरान खान ने अगले दिन अपना बयान दर्ज कराया था। उच्च न्यायालय की पीठ ने रिकॉर्ड पर गौर किया और पाया कि आजम खान 15 जून को लापता हो गए थे और एक महीने बाद अपना बयान दर्ज कराने के बाद 20 जुलाई को फिर से सामने आए। इमरान के वकील ने पूर्व नौकरशाह की गवाही पर संदेह जताया और दलील दी कि यह गवाही संदिग्ध परिस्थितियों में दर्ज की गई थी। उन्होंने अदालत से आजम खान की गवाही पर कोई भरोसा न करने का आग्रह किया। सफदर ने दलील दी कि मजिस्ट्रेट ने अन्य आरोपियों को पूर्व नोटिस जारी किए बिना उनका बयान दर्ज किया।