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Pakistan: पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर जुल्म जारी, पुलिस ने अहमदी समुदाय की कब्रों को किया तबाह

Sat, 15 Jun 2024 08:55 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

जमात ए अहमदिया ने कहा कि 'टीएलपी कार्यकर्ता अहमदी समुदाय को धमका रहे थे और पुलिस पर अहमदी कब्रों के पत्थर तोड़ने का दबाव बना रहे थे। कानून लागू करने वालों द्वारा चरमपंथियों की अवैध मांग का समर्थन किए जाने से वहां रहने वाले अहमदी समुदाय के लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।'
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पाकिस्तान में अहमदी समुदाय पर अत्याचार जारी - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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पाकिस्तान में पुलिस ने एक कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी के दबाव में आकर शनिवार को पंजाब प्रांत में अल्पसंख्यक अहमदी समुदाय की 17 कब्रों को नष्ट कर दिया। गौरतलब है कि इस सप्ताह ऐसी दूसरी घटना है। यह घटना पंजाब की राजधानी लाहौर से करीब 400 किलोमीटर दूर बहावलपुर में हुई। जमात-ए-अहमदिया पाकिस्तान ने बयान जारी कर कहा, 'तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के दबाव में, पंजाब पुलिस ने बहावलपुर जिले के बस्ती शुक्रानी में अहमदी समुदाय के एक कब्रिस्तान में कम से कम 17 कब्रों को अपवित्र किया।'
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टीएलपी के दबाव में काम कर रही पुलिस
जमात ए अहमदिया ने कहा कि 'टीएलपी कार्यकर्ता अहमदी समुदाय को धमका रहे थे और पुलिस पर अहमदी कब्रों के पत्थर तोड़ने का दबाव बना रहे थे। कानून लागू करने वालों द्वारा चरमपंथियों की अवैध मांग का समर्थन किए जाने से वहां रहने वाले अहमदी समुदाय के लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।' जमात ए अहमदिया का कहना है कि पंजाब सरकार ने कब्रिस्तान की जमीन अहमदी समुदाय को आवंटित की थी। अहमदी कब्रों से कब्र के पत्थर हटाते समय स्थानीय मौलवी भी पुलिस कर्मियों के साथ थे। 

पाकिस्तान में कट्टरपंथियों के निशाने पर रहा है अहमदी समुदाय
पाकिस्तान में अहमदी समुदाय पर अत्याचार का पुराना रिकॉर्ड है। पिछले साल पाकिस्तान में अहमदी अल्पसंख्यक समुदाय के पूजा स्थलों को अपवित्र करने की कम से कम 43 घटनाएं हुईं, जिनमें से ज्यादातर पंजाब में हुईं थीं। अधिकांश अहमदी पूजा स्थलों पर कट्टरपंथी इस्लामवादियों टीएलपी कार्यकर्ताओं ने हमला किया है, जबकि अन्य घटनाओं में पुलिस ने चरमपंथियों के दबाव में अहमदी मस्जिदों से मीनारें, मेहराबें गिरा दीं। गौरतलब है कि लाहौर उच्च न्यायालय का एक फैसला है जिसमें कहा गया है कि 1984 में जारी एक विशेष अध्यादेश से पहले बने अहमदी पूजा स्थल वैध हैं और इसलिए उन्हें बदला या गिराया नहीं जाना चाहिए। इसके बावजूद पाकिस्तान में अहमदी समुदाय और उनके धार्मिक स्थल कट्टरपंथियों के निशाने पर रहते हैं। 
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टीएलपी का कहना है कि अहमदियों को मुस्लिम के रूप में पहचानने वाले किसी भी प्रतीक का निर्माण या प्रदर्शन करना, जैसे कि मस्जिदों पर मीनारें या गुंबद बनाना, या कुरान की आयतों को सार्वजनिक रूप से लिखना स्वीकार्य नहीं है। हालांकि अहमदी खुद को मुस्लिम मानते हैं, लेकिन 1974 में पाकिस्तान की संसद ने इस समुदाय को गैर-मुस्लिम घोषित कर दिया था। एक दशक बाद, उन्हें न केवल खुद को मुस्लिम कहने पर प्रतिबंध लगा दिया गया, बल्कि इस्लाम के कुछ पहलुओं का पालन करने से भी रोक दिया गया।

बीते हफ्ते भी दो अहमदियों की गोली मारकर कर दी गई थी हत्या
पाकिस्तान में अहमदी समुदाय के खिलाफ नफरत का अभियान कथित तौर पर अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर है और पिछले हफ्ते पंजाब में उनके दो सदस्यों की कथित तौर पर उनकी आस्था के कारण एक किशोर ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। जमात-ए-अहमदिया पाकिस्तान के एक पदाधिकारी ने बताया कि बुधवार को पाकिस्तानी अधिकारियों ने पंजाब प्रांत में अल्पसंख्यक समुदाय के 54 साल पुराने पूजा स्थल की मीनारों को ध्वस्त कर दिया। टीएलपी के दबाव में ही एक दर्जन पुलिसकर्मियों को लाहौर के जहमान बुर्की इलाके में अहमदी पूजा स्थल की मीनारों को ध्वस्त करते देखा गया।
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