शरीफ ने कहा, बुधवार को कई न्यायाधीशों को पत्र भेजे गए थे और उनमें एक संदिग्ध पाउडर के बारे में जो रिपोर्ट सामने आई है। मुझे लगता है कि हमें इस पर पूरी जिम्मेदारी दिखानी चाहिए और इसमें किसी तरह की सियासत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, पाकिस्तान सरकार जिम्मेदारी की भावना के साथ इसकी जांच करेगी।
सेलो टेप से सील किए गए सफेद लिफाफों में सभी न्यायाधीशों को सौंपे गए पत्रों में उनके नाम और अदालत का पता लिखा हुआ था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पत्रों में धमकी भरी बातों के संकेत थे और न्यायाधीशों पर पाकिस्तान के लोगों की समस्याओं के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया गया है।
दो न्यायाधीशों के कर्मचारियों ने लिफाफे खोले और अंदर संदिग्ध पाउडर मिला। उन्होंने मामले की सूचना इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार को दी, जिन्होंने अदालत की सुरक्षा में तैनात पुलिस अधिकारियों को तलब किया। एक मामला दर्ज किया गया है। प्राथमिकी के अनुसार पत्र, भेजने वाले के अधूरे पते के साथ जारी किए गए थे। प्राथमिकी में कहा गया है कि तहरीक-ए-नमूस पाकिस्तान का जिक्र करते हुए पत्रों में न्याय प्रणाली की आलोचना की गई है और धणकी के साथ विशेष फोटो और अंग्रेजी शब्द बेसिलस एन्थ्रेसिस शब्द का इस्तेमाल किया गया है।
इसी तरह के पत्र अगले दिन सर्वोच्च न्यायालय और लाहौर उच्च न्यायालय में पहुंचे, जिसके बाद आतंकवाद रोधी विभाग (सीटीडी) ने इस्लामाबाद और लाहौर में दो मामले दर्ज किए। शीर्ष अदालत ने ये पत्र पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश काजी फैज ईसा, न्यायमूर्ति अतहर मिनल्लाह, न्यायमूर्ति जमाल खान और न्यायमूर्ति अमीनुद्दीन को भेजे हैं।