मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) सिकंदर सुल्तान राजा ने शुक्रवार को पत्रकारों के साथ बातचीत की। इस दौरान चुनाव कार्यक्रम के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि आठ फरवरी के 54 दिनों की उल्टी गिनती शुरू करें। राजा ने यह भी कहा कि ईसीपी तय समय से पहले सक्रियता से चुनाव संबंधी जिम्मेदारियों को संभाल रहा है।
इस साल जून में पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) सरकार ने चुनाव अधिनियम में संशोधन किया था, ताकि ईसीपी को आम चुनाव की तारीख तय करने की शक्तियां दी जा सकें। यह संशोधन इसलिए भी किया गया कि चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा से लेकर मतदान के दिन तक प्रक्रियाओं की समय सीमा को परिभाषित किया जा सके, जो करीब 54 दिन है।
राजा ने कहा कि अपडेटेड निर्वाचन क्षेत्र की सूची जारी कर दी गई है और चुनाव से पहले की अन्य सभी अपेक्षाओं को पूरा किया जा रहा है। चुनाव आयोग के प्रमुख की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब सियासी हलकों में समय पर चुनाव कराने को लेकर संदेह जताया जा रहा है, क्योंकि ईसीपी मतदान के दिन तक की प्रक्रिया के लिए कोई समय सारिणी (टाइमटेबल) नहीं दे रहा है। ईसीपी नेशनल असेंबली के भंग होने के 90 दिनों के भीतर चुनाव कराने में पहले ही विफल रहा है।
हालांकि, इसने पीडीएम सरकार का कार्यकाल खत्म होने से कुछ दिन पहले घोषित नए जनगणना परिणामों के चलते नए चुनावी जिलों को चिह्नित करने में काफी समय लगाया। ईसीपी ने कहा कि नए परिसीमन के बाद नेशनल असेंबली (एनए) में 336 सीटें होंगी, जिसमें 266 सामान्य सीटें, महिलाओं के लिए आरक्षित 60 सीटें और गैर-मुस्लिमों के लिए 10 सीटें शामिल होंगी। परिसीमन से पता चलता है कि असेंबली की क्षमता पहले की 342 सीटों से छह सीटों तक कम हो गई है।
साइफर मामले में सुनवाई सोमवार तक स्थगित
पाकिस्तान की एक अदालत ने गोपनीय राजनयिक केबल लीक (साइफर) मामले में आज पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी उपस्थिति दर्ज की और सुनवाई को सोमवार तक स्थगित कर दिया। दोनों नेता अभी जेल में बंद हैं।
विशेष अदालत के न्यायाधीश अबुल हसनत जुल्केरनैन ने रावलपिंडी की अदियाला जेल में हुई सुनवाई की अध्यक्षता की। यह मामला इन आरोपों पर आधारित है कि दोनों ने मार्च 2022 में वॉशिंगटन में दूतावास द्वारा भेजे गए एक संचार को संभालने के दौरान देश के गोपनीय कानूनों का उल्लंघन किया।
सुनवाई के दौरान कुरैशी ने अदालत से राष्ट्रपति आरिफ अल्वी को तलब करने का अनुरोध किया, ताकि वह अदालत के समक्ष गवाही दे सकें कि क्या उन्होंने सरकारी गोपनीयता कानून, 1923 में बदलाव को मंजूरी दी है। मामले को निराधार बताते हुए कुरैशी ने याद दिलाया कि राष्ट्रपति अल्वी ने कहा था कि उन्होंने सरकारी गोपनीयता कानून में संशोधन करने वाले विधेयकों को मंजूरी नहीं दी थी।