स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के सीनियर प्रोफेसर प्रहलाद कुमार बताते हैं कि पाकिस्तान के जीडीपी का 40% से ज्यादा हिस्सा कर्ज से चल रहा है। तीन साल के अंदर इसमें जबरदस्त इजाफा देखने को मिला है। इतना कर्ज कि कोई भी देश आसानी से बर्बाद हो सकता है।
क्या कहते हैं आंकड़े ?
2008 से जून 2021 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो पाकिस्तान की हालत साफ हो जाएगी। 2008 में युसूफ रजा गिलानी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री थे। उनका कार्यकाल 2012 तक रहा। इस बीच पाकिस्तान ने 42.8 बिलियन यूएस डॉलर का कर्ज अलग-अलग देश और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएफएफ) कर्ज लिया था। इसके बाद 2012 से 2013 के बीच रजा परवेज अशरफ और मीर हजर खान प्रधानमंत्री रहे। इस दौरान पाकिस्तान का कर्ज 42.8 बिलियन यूएस डॉलर से 52.4 बिलियन यूएस डॉलर पहुंच गया।
इसके बाद 5 जून 2013 को नवाज शरीफ ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली। 2017 में शहबाज शरीफ और शाहिद खाकन अब्बासी प्रधानमंत्री बने। इसके बाद एक जून 2018 से 18 अगस्त 2018 के बीच नसीर-उल-मुल्क प्रधानमंत्री बने। तब तक पाकिस्तान का कर्ज भी बढ़कर 73.3 बिलियन डॉलर हो गया।
इमरान के पीएम बनने के बाद से कर्ज में जबरदस्त इजाफा
इमरान खान ने 18 अगस्त 2018 को प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली। इसके बाद से कर्ज के मामले में पाकिस्तान हर साल नया रिकॉर्ड बनाते चला गया। ताजे आंकड़ों पर नजर डालें तो अगस्त 2018 से दिसंबर 2020 तक पाकिस्तान ने चीन, सऊदी समेत कई देशों और आईएमएफ से करीब 42.4 बिलियन यूएस डॉलर का कर्ज लिया। इसी के साथ पाकिस्तान का कुल कर्ज 115.7 बिलियन यूएस डॉलर हो गया। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के जून 2021 के आंकड़ों पर नजर डालें तो ये कर्ज अब बढ़कर 122.199 बिलियन यूएस डॉलर तक पहुंच गया है। इसमें वो रकम नहीं जुड़ी है जिसे बुधवार को सऊदी ने कर्ज के रूप में पाकिस्तान को दिया है।
कर्ज का 15% हिस्सा केवल चीन का
प्रो. प्रहलाद बताते हैं, 'पाकिस्तान ने अब तक जो कर्ज लिया है उसमें 2020 तक 17.1 बिलियन यूएस डॉलर यानी कुल कर्ज का 15% हिस्सा अकेले चीन ने दिया है। ये कर्ज पाकिस्तान के जीडीपी का 6.15% है। ओवरऑल आंकड़ों पर अगर नजर डालें तो पाकिस्तान ने अब तक अपने जीडीपी का 40% से ज्यादा हिस्सा कर्ज से लिया है। अभी पाकिस्तान का जीडीपी करीब 300 बिलियन यूएस डॉलर है। इसमें 122.199 बिलियन यूएस डॉलर कर्ज के रूप में मिले हैं।
देश चलाने के लिए अभी और कर्ज की जरूरत
इमरान खान को पाकिस्तान चलाने के लिए अभी और कर्ज की जरूरत है। पाकिस्तान को अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए अगले दो वर्ष भीतर करीब नौ लाख 92 हजार करोड़ रुपये (पाकिस्तानी मुद्रा) की बाहरी मदद की जरूरत है।
द न्यूज इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की तरफ से बहुत रूढ़िवादी अनुमान लगाने के बावजूद पाकिस्तान की सकल बाहरी वित्त पोषण की जरूरत 2021-22 में 23.6 अरब अमेरिकी डॉलर और 2022-23 में 28 अरब अमेरिकी डॉलर है। यानी आने वाले दो वर्ष में पाकिस्तान को 51.6 अरब अमेरिकी डॉलर के बाहरी वित्त पोषण की जरूरत होगी। पाकिस्तान फिलहाल आईएमएफ से छह अरब डॉलर के समझौते में से तीसरी किस्त के तहत एक अरब डॉलर हासिल करने की जद्दोजहद में लगा है।
अप्रैल तक एफएटीएफ के ग्रे लिस्ट में रहेगा पाक
पाकिस्तान अगले साल अप्रैल तक फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स यानी एफएटीएफ के ग्रे लिस्ट में बना रहेगा। अप्रैल में एफएटीएफ की बैठक होगी और उसमें तय होगा कि पाकिस्तान को फिर से कर्ज देना है या नहीं।
अभी अंतर्राष्ट्रीय वित्त सुविधा (आईएमएफ) से पाकिस्तान को समझौते के तहत तीसरी किस्त के रूप में छह अरब डॉलर मिलने की संभावना है। लेकिन इससे पहले ही एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में फिर से पाकिस्तान का नाम आ गया। ऐसे में अब आशंका जताई जा रही है कि आईएमएफ अपने विस्तारित फंड सुविधा (ईएफएफ) के तहत पाक को यह रकम नहीं देगा। अगर ऐसा होता है तो पाकिस्तान आर्थिक तौर पर तबाह होने की तरफ बढ़ जाएगा। क्योंकि, आईएमएफ के ऋण कार्यक्रम की पात्रता खोने के बाद पाक को विश्व बैंक व एशियन डवलपमेंट बैंक जैसे बहुस्तरीय कर्जदारों से भी ऋण नहीं मिल पाएगा।