तालिबान के कब्जे के बाद से अफगानिस्तान की स्थिति काफी खराब हो गई। इसे सुधारने के लिए भारत 10 नंवबर को एनएसए स्तर की बैठक आयोजित करेगा। इस बैठक में शामिल होने से बचने के लिए पाकिस्तान ने नया पैंतरा अपनाया है। उसने बैठक में शामिल होने के लिए भारत के अनुरोध को ठुकरा दिया है।
पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद युसूफ ने कहा है कि वह 10 नवंबर को अफगानिस्तान पर भारत द्वारा बुलाई गई बैठक में शामिल नहीं होंगे। दरअसल, भारत ने इस बैठक के लिए चीन, रूस, ईरान और अन्य देशों के साथ पाकिस्तान को भी आमंत्रित किया था। यूसुफ ने कहा, 'एक बिगाड़ने वाला शांतिदूत की भूमिका नहीं निभा सकता, इसलिए बैठक में नहीं जाएंगे।'
इससे पहले पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने भारत के निमंत्रण को स्वीकार किया था लेकिन यह भी कहा कि उचित समय पर निर्णय लिया जाएगा। विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने पहले कहा था कि पाकिस्तान का निर्णय दो परमाणु-सशस्त्र पड़ोसियों के बीच संबंधों की वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते हुए होगा।
बता दें कि 2016 में पठानकोट एयर फोर्स बेस पर हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में दरार आ गई थी। उरी में भारतीय सेना के शिविर पर हमला और इसके बाद हुए हमलों ने दोनों देशों के रिश्ते को और खराब कर दिया।
मालूम हो कि साल 2019 में पुलवामा आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। इसके जवाब में भारत के युद्ध विमानों ने 26 फरवरी 2019 को पाकिस्तान के अंदर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर पर हमला किया था। इसके बाद से दोनों देशों के रिश्ते और खराब हो गए।