इस्तेकाम-ए-पाकिस्तान (आईपीपी) के तरीन, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ सांसद (पीटीआई-पी) के खट्टक और जमात-ए-इस्लामी (जेआई) के हक की ओर से यह फैसला ऐसे वक्त में आया है, जब नेशनल असेंबली और चार प्रांतों के चुनाव में उनके दलों की करारी हार हुई है।
तरीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म'एक्स' पर कहा, इस चुनाव में मेरा समर्थन करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद करना चाहता हूं और अपने विरोधियों को बधाई देना चाहता हूं। मैं पाकिस्तान के लोगों की इच्छा का बहुत सम्मान करता हूं। इसलिए, मैंने आईपीपी के अध्यक्ष के रूप में पद से इस्तीफा देने और सियासत से पूरी तरह दूर होने का फैसला किया है। उन्होंने कहा,'आईपीपी के सभी सदस्यों का आभार। मैं आप सभी को शुभकामनाएं देता हूं। अल्लाह के रहमोकरम से मैं अपनी व्यक्तिगत हैसियत से देश की सेवा करता रहूंगा।'
जहांगीर तरीन कभी पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के करीबी सहयोगी थी। लेकिन, इन चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। उनकी नवगठित पार्टी आईआईपी ने नेशनल असेंबली की केवल दो और प्रांतीय विधानसभा की एक सीट पर जीत दर्ज की।
इस बीच, पीटीआई पार्टी से अलग हुए धड़े पीटीआई-पी के प्रमुख परवेज खटक ने पार्टी के पद से यह कहते इस्तीफा दिया है कि वह सियासत से फिलहाल ब्रेक ले रहे हैं।उनकी पार्टी आम चुनाव में एक भी सीट हासिल करने में सफल नहीं हो पाई। चुनाव प्रचार के दौरान खट्टक ने दावा किया था कि वह खैबर पख्तूनख्वा के अगले मुख्यमंत्री होंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि वह पीटीआई समर्थित निर्दलीय उम्मीदवारों के जीतने के बाद उनके साथ गठबंधन करेंगे। खट्टक के दो बेटे और एक दामा नौशेरा की सभी सात सीटों से चुनाव लड़ रहे थे। लेकिन किसी को भी जीत हासिल नहीं हुई।
वहीं, जमात-ए-इस्लामी (जेआई) के हक ने घोषणा की कि वह जल्द ही पार्टी के प्रमुख के पद से हट रहे हैं। उन्हों चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी ली। एक पोस्ट में उन्होंने कहा, मैं चुनावी हार को स्वीकार करता हूं और अपना इस्तीफा दे रहा हूं। जेआई को नेशनल असेंबली के लिए किसी भी सीट पर जीत नहीं मिली। हालांकि, सिंध और बलूचिस्तान में पार्टी को तीन सीट पर जीत मिली। जिनमें एक सीट को उनकी पार्टी के नेता नईमूर रहमान ने सोमवार को खाली कर दिया है।