पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान
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पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दरअसल पाकिस्तान की एक विशेष अदालत ने गोपनीय दस्तावेज लीक मामले में (सिफर मामले) जेल में बंद पूर्व पीएम इमरान खान की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। विशेष अदालत के न्यायाधीश अबुल हसनत जुल्करनैन ने इमरान खान और पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को राहत देने से इनकार कर दिया और जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के बाद उन्हें खारिज कर दिया।
26 सितंबर तक बढ़ाई गई न्यायिक हिरासत
बता दें कि इमरान खान और शाह महमूद कुरैशी पर आरोप है कि उन्होंने अपने राजनीतिक फायदे के लिए गोपनीय दस्तावेज को गलत तरीके से अपने पास रखा और उसका दुरुपयोग किया। इसके लिए इमरान खान और शाह महमूद कुरैशी को आधिकारिक गोनीयता अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था। बुधवार को सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत 26 सितंबर तक बढ़ाने का आदेश दिया। गौरतलब है कि इस मामले में इस्लामाबाद हाईकोर्ट पहले ही इमरान खान की सजा को निलंबित कर चुका है लेकिन इसके बावजूद इमरान खान जेल में हैं। पिछले महीने इस मामले में इमरान खान की रिमांड 14 दिनों के लिए 13 सितंबर तक बढाई थी।
क्या है गोपनीय दस्तावेज लीक मामला (Cypher Case)
पिछले साल मार्च में इमरान खान की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान से पहले एक जनसभा के दौरान इमरान खान ने जेब से एक कागज निकालकर लहराया था और दावा किया था कि उनकी सरकार गिराने के लिए अंतरराष्ट्रीय साजिश रची जा रही है। आरोप है कि बीते साल मार्च में वॉशिंगटन से पाकिस्तान स्थित दूतावास में एक केबल भेजा गया था, जो लीक हो गया और इमरान खान ने कथित तौर पर उसे ही जनसभा के दौरान लहराया था। हालांकि बाद में पूछताछ के दौरान इमरान खान ने गोपनीय दस्तावेज के रैली में लहराने से इनकार किया था। इमरान ने ये भी कहा कि उनसे वह गोपनीय दस्तावेज गुम हो गया है और उन्हें याद नहीं आ रहा है कि उन्होंने उसे कहां रख दिया है।