पाकिस्तान की प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान यानी टीएलपी ने सोमवार को इमरान सरकार के साथ पहले दौर की बातचीत के बाद 11 पुलिसकर्मियों को रिहा कर दिया।
इन पुलिसकर्मियों को टीएलपी के एक समूह ने लाहौर में सुरक्षा बलों के साथ हिंसक झड़प के बीच रविवार को बंधक बनाया था। फ्रांस में पिछले साल प्रकाशित एक कार्टून को ईशनिंदा का उदाहरण बताते हुए फ्रांसीसी राजदूत को निष्कासित करने की अपनी मांग पर दबाव बनाने के लिए टीएलपी ने रविवार को इन 11 पुलिस कर्मियों को बंधक बनाया था।
इमरान सरकार को करना पड़ी बातचीत
इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी की सरकार ने पिछले सप्ताह टीएलपी पर आतंकवाद रोधी कानून के तहत प्रतिबंध लगाते हुए उसके बैंक खातों पर रोक लगा दी थी। तब इमरान सरकार ने इस आतंकी समूह के साथ कोई बातचीत नहीं करने का एलान किया था।
लाहौर में हुई थी सुरक्षा बलों के साथ झड़प
बहरहाल, रविवार को लाहौर में सुरक्षा एजेंसियों की इस समूह के सदस्यों के साथ झड़प हुई और समूह ने 11 पुलिसकर्मियों तथा रेंजरों को बंधक बना लिया। इसके बाद सोमवार को सरकार ने इस समूह के साथ बातचीत की।
साद रिजवी की गिरफ्तारी का कर रही विरोध
कट्टरपंथी तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान पार्टी अपने नेता साद रिजवी की गिरफ्तारी का भी विरोध कर रही है और प्रधानमंत्री इमरान खान पर रिजवी को तुरंत रिहा करने का दबाव बना रही है। शुरुआत में पुलिस ने बताया था कि प्रदर्शन कर रहे समूह ने पांच पुलिसकर्मियों को बंधक बनाया है। बाद में एक वीडियो संदेश में गृहमंत्री शेख रशीद ने कहा कि रिजवी के समर्थकों ने 11 पुलिसकर्मियों को बंधक बनाया है। उन्होंने बताया कि सरकार के साथ पहले दौर की वार्ता सफल होने के बाद पुलिसकर्मियों को छोड़ा गया है।
बंधक पुलिसकर्मियों को प्रताड़ित किया
मंत्रालय ने एक तस्वीर जारी की है जिसमें दिख रहा है कि पुलिसकर्मियों को प्रताड़ित किया गया। रशीद ने बताया कि टीएलपी के साथ पहले दौर की बातचीत अच्छी रही। मंत्री ने उम्मीद जताई कि दूसरे दौर की बातचीत में अन्य मुद्दों को भी सुलझा लिया जाएगा।