पाकिस्तान का सुप्रीम कोर्ट अब सार्वजनिक हित से जुड़े मामलों में स्वत: संज्ञान ले सकेगा। पाकिस्तान सरकार ने मुख्य न्यायाधीश की शक्तियों को बढ़ाते हुए सुप्रीम कोर्ट (अभ्यास और प्रक्रिया) संशोधन अध्यादेश 2024 को पारित किया। शहबाज शरीफ कैबिनेट की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने अध्यादेश पर हस्ताक्षर किए।
पहले सुप्रीम कोर्ट (अभ्यास और प्रक्रिया) अधिनियम 2023 के तहत सार्वजनिक हित से जुड़े मुद्दों पर कार्रवाई करने की मुख्य न्यायाधीश की शक्तियां कम कर दी गईं थी। इसके तहत मुख्य न्यायाधीश मामलों पर सुनवाई करने के लिए न्यायाधीशों का एक पैनल भी गठित करते थे। अब एक बार फिर संशोधन के जरिये अध्यादेश में मुख्य न्यायाधीश की शक्तियों को बढ़ाया गया है। इसके तहत तीन सदस्यीय समिति में शीर्ष न्यायाधीश, एक वरिष्ठ न्यायाधीश और मुख्य न्यायाधीश द्वारा नामित एक न्यायाधीश शामिल होंगे। यह समिति साधारण बहुमत से विवादास्पद मामलों का फैसला करेगी।
अध्यादेश के मुताबिक हर मामले की सुनवाई उसकी बारी के अनुसार की जाएगी, अन्यथा उसे बारी से बाहर करने का कारण बताया जाएगा। हर मामले और अपील को दर्ज किया जाएगा और इसकी प्रतिलिपि तैयार की जाएगी, जो जनता के लिए उपलब्ध होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि नए अध्यादेश के मुताबिक मुख्य न्यायाधीश का पैनल में जजों का चयन करने के लिए समर्थन जुटाना होगा। नए अध्यादेश के तहत अगले महीने कार्यकाल पूरा होने ओर बढ़ रहे मुख्य न्यायाधीश काजी फैज ईसा प्रमुख मामलों में पीठों का गठन कर सकेंगे।
यह अध्यादेश जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी को आरक्षित सीटों के आवंटन को लेकर शीर्ष अदालत और सरकार के बीच बढ़ते विवाद के बीच आया है। सुप्रीम कोर्ट ने 12 जुलाई को फैसला सुनाया था कि पीटीआई एक संसदीय दल है और आरक्षित सीटों के लिए पात्र है। पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तान के चुनाव आयोग को आरक्षित सीटें आवंटित करने के लिए एक स्पष्टीकरण जारी किया था, लेकिन नेशनल असेंबली के अध्यक्ष अयाज सादिक ने पाकिस्तान चुनाव आयोग को एक पत्र लिखा कि चुनाव कानूनों में बदलाव के बाद पीटीआई आरक्षित सीटों के लिए पात्र नहीं है।
आरक्षित सीटों का मुद्दा आठ फरवरी के चुनावों के तुरंत बाद उठा था जब पीटीआई समर्थित स्वतंत्र उम्मीदवार सुन्नी इत्तेहाद परिषद (एसआईसी) में शामिल हो गए, लेकिन चुनाव आयोग ने उन्हें आरक्षित सीटें आवंटित करने से इनकार कर दिया। पेशावर उच्च न्यायालय (पीएचसी) ने भी 14 मार्च को ईसीपी फैसले के खिलाफ अपील खारिज कर दी थी। अप्रैल में एसआईसी ने पीएचसी के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने पेशावर हाईकोर्ट के फैसले के साथ-साथ एसआईसी को महिलाओं और अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित सीटों से वंचित करने के फैसले को निलंबित कर दिया था