कोरोना महामारी के बीच बच्चों में मोटापा गंभीर समस्या बनती जा रही है अमेरिका में बच्चों में महामारी के बीच मोटापा बढ़ता देख सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (सीडीसी) चिंतित है। वहीं भारत में भी विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना महामारी के कारण से बच्चों के जीवन में आए अचानक बदलाव से बच्चों में मोटापे की बीमारी बढ़ रही है, जो भविष्य के लिए चिंता की बात है।
10 में से 2 बच्चों का वजन महामारी में सामान्य से अधिक हुआ
लखनऊ के डॉक्टर राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर दीप्ति अग्रवाल का कहना है कि कोरोना के दौर में 10 में से 2 बच्चों का वजन सामान्य से अधिक हुआ है। महामारी के दौर में बच्चों का खानपान भी बिगड़ा है। स्कूल बंद होने के कारण बच्चे काफी समय से घर पर हैं।
10 में से 5 बच्चों का खानपान बिगड़ा जो चिंताजनक स्थिति
माना जा रहा है कि हर 5 में से 2 बच्चों का खानपान बिगड़ा है जिसके कारण वजन बढ़ने के साथ ही पहले की तुलना में अधिक आलसी हो गए हैं। केजीएमयू के पल्मोनरी क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट डॉ वेद प्रकाश बताते हैं की मोटापा अधिक होगा, तो बच्चे की शारीरिक क्रिया उतनी ही खराब होगी। ऐसे बच्चों में सांस संबंधी तकलीफ का खतरा ज्यादा रहता है। कोरोना वायरस जो सांस संबंधी तकलीफ का कारण है, वह मुश्किल खड़ी कर सकता है।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर ओपी मिश्रा का कहना है कि सीडीसी की चिंता सही है। महामारी के कारण बच्चों का जीवन सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ा है। यही नहीं स्क्रीन पर रहने के दौरान वे कुछ न कुछ खाते रहते हैं। ज्यादा खाना वो भी फास्ट या जंक फूड सेहत के लिए अच्छा नहीं है।
तो नई महामारी का होगा जन्म
लखनऊ के लोहिया संस्थान के फिजिशियन डॉ संजय चौधरी बताते हैं कि कोरोना से बचने के लिए घर में कैद बच्चों का वजन सामान्य से अधिक होने का मतलब भविष्य में नई महामारी को जन्म देने की तैयारी चल रही है। इस कठिन समय में बच्चों को लेकर अभिभावकों ने सावधानी नहीं बरती तो भविष्य में बच्चों में कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी तकलीफों को लेकर परेशान रहना पड़ सकता है।
बच्चे का वजन सामान्य से अधिक तो नहीं
डॉक्टर ओपी मिश्रा बताते हैं कि महामारी के दौर में बच्चों में मोटापे की क्या स्थिति है ये आने वाला वक्त बताएगा। इसके लिए महामारी से पहले बच्चे के वजन की तुलना महामारी के दौर में बच्चे के वजन से की जाए। अगर सामान्य है तो अच्छी बात है। लेकिन असामान्य ढंग से वजन बढ़ा है और समय के साथ बच्चा सुस्त होता जा रहा है, तो ध्यान देने की बात है। बच्चे के स्वास्थ्य के लिए यह बेहतर नहीं है।
जॉन हॉपकिंस अस्पताल की पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. रिसा वाल्फ का कहना है कि अभिभावकों को बच्चों के शरीर की मजबूती पर ध्यान देना चाहिए। घर में स्कूल जाने वाले बच्चों को 60 मिनट कसरत करा सकते हैं। आपके बच्चों का वजन बढ़ रहा है तो उसे फलों का रस और सोडा देना बंद करें। इससे उसका मोटापा बढ़ना रुक जाएगा।
अस्पताल में नहीं घर पर ही इलाज
डॉक्टर ओपी मिश्रा बताते हैं कि मोटापा एक गंभीर समस्या है। लेकिन महामारी के दौर में इसके इलाज के लिए अस्पताल जाने की जरूरत नहीं है। बच्चों को इनडोर एक्टिविटी कराएं जैसे हल्की एक्सरसाइज, डांस, जोगिंग, खान-पान पर नियंत्रण रखें, फास्ट फूड, पैक फूड जैसे चिप्स नमकीन देना बंद करें। हरी सब्जी, दाल रोटी, फल पर्याप्त मात्रा में खिलाएं।
भविष्य के लिए खतरनाक कैसे
- सामान्य से अधिक वजन तो हाइपरटेंशन की बीमारी
- टाइप टू डायबिटीज स्ट्रोक वह सांस संबंधी दिक्कत
- कॉलेस्ट्रॉल, पित्त की थैली वह हृदय संबंधी तकलीफ
मोटापे की चपेट में आने का कारण
बच्चे घर में ज्यादा खा रहे हैं, फास्ट फूड बढ़ गया है, कोरोना के डर से खेलकूद भी बंद है। टीवी व गैजेट्स पर निर्भर, शारीरिक व्यायाम का बंद होना, महानगरों में तकलीफ ज्यादा देखी गई।