अमेरिका टैक्स विभाग- आईआरएस हर तीन महीने पर उन लोगों की लिस्ट प्रकाशित करता है, जिन्होंने अपनी नागरिकता या ग्रीन कार्ड को त्याग दिया। ताजा विश्लेषण के मुताबिक अमेरिकी नागरिकता छोड़ने वालों की संख्या में बढ़ोतरी 2010 से शुरू हुई। उस साल फॉरेन अकाउंट टैक्स कॉम्पलायंस एक्ट (फाक्टा) पास हुआ था। इस कानून के जरिए विदेशों में रहने वाले अमेरिकियों को टैक्स संबंधी सूचना देने के प्रावधान सख्त कर दिए गए। साथ ही जुर्माने की रकम भी बढ़ा दी गई।
अमेरिका में कनेक्टिकट स्थित अंतरराष्ट्रीय टैक्स संबंधी वकील एंड्यू मिचेल ने वेबसाइट एक्सियोस.कॉम से कहा- फाक्टा ने एक तरह से लोगों को झुंड में बाहर निकलन को मजबूर कर दिया। उसका कानून से व्यवहार में दुनियाभर के बैंकों को ये अधिकार मिल गया कि वे अमेरिकियों की गुप्त जानकारियां हासिल कर लें।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक अमेरिकी विदेश मंत्रालय लगातार इस प्रयास में जुटा रहता है कि लोग उन सुविधाओं और विशेषाधिकारों को न त्यागें। ये बात कही जाती है कि ये विशेषाधिकार पाने के लिए दुनियाभर के लोग अमेरिका आने की ताक में रहते हैँ। लेकिन ऐसा लगता है कि धनी लोगों के लिए टैक्स बचाना अमेरिकी नागरिक के रूप में मिलने वाली सुविधाओं से ज्यादा अहम हो गया है।
नागरिकता त्यागने की बढ़ रही घटनाओं के बारे में अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कोई टिप्पणी नहीं की है। लेकिन अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने एक रिपोर्ट में बताया है कि 2020 में जो आंकड़े सामने आए, वे किसी एक साल के नहीं हैं। बल्कि कई लोगों के नागरिकता छोड़ देने संबंधी सूचना देर से आती है। लेकिन जानकारों का कहना है कि अगर लंबी अवधि में भी इतनी बड़ी संख्या में लोगों ने देश की नागरिकता छोड़ी, तो वह भी अमेरिका में बीते एक दशक में बने माहौल का संकेत देता है।