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वेतन नहीं रहा गैर-बराबरी को आंकने का पैमाना: अमेरिका में जायदाद वालों के मजे, बाकी सब मुसीबत में!

Tue, 31 Aug 2021 02:40 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

विश्लेषण में बताया गया है कि जायदाद के लिहाज से देश के अलग-अलग इलाकों में गैर-बराबरी की खाई बढ़ गई है। कुछ राज्य और उन राज्यों के भीतर कुछ काउंटी (जिले) ऐसे हैं, जहां जायदाद के ज्यादातर मालिक रहते हैं। उनकी आमदनी तेजी से बढ़ी है...
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new york - फोटो : pixabay
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विस्तार
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अमेरिका में आमदनी में गैर-बराबरी को आंकने की कसौटी वेतन है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ये पैमाना अब बेमतलब हो गया है। इसलिए कि अमेरिका में बढ़ रही गैर-बराबरी का कारण वेतन में असमानता नहीं है। बल्कि इसकी वजह शेयर, किराये, और ब्याज से होने वाली आमदनी में भारी बढ़ोतरी है।

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एक थिंक टैंक के हवाले से वेबसाइट ब्लूमबर्ग.कॉम पर छपे एक विश्लेषण में बताया गया है कि अमेरिका में इन स्रोतों से होने वाली आमदनी का हिस्सा कुल व्यक्तिगत आय में 20 फीसदी हो गया है। अमेरिकी आबादी में ऐसे लोग बहुत कम हैं, जिनके पास अपने आवास के अलावा कोई जायदाद और रिटायरमेंट खाता हो (यानी जिन्होंने रिटायरमेंट के बाद की आय के लिए निवेश कर रखा हो)। निम्न आय वर्ग के लोगों के पास तो अपना आवास या रिटायरमेंट खाता भी नहीं है।

विश्लेषण में बताया गया है कि जायदाद के लिहाज से देश के अलग-अलग इलाकों में गैर-बराबरी की खाई बढ़ गई है। कुछ राज्य और उन राज्यों के भीतर कुछ काउंटी (जिले) ऐसे हैं, जहां जायदाद के ज्यादातर मालिक रहते हैं। उनकी आमदनी तेजी से बढ़ी है। ये विश्लेषण थिंक टैंक इंक्लूसिव वेल्थ बिल्डिंग इनिशिटिव ने किया है। डिस्ट्रिक्ट कोलंबिया स्थित इस थिंक टैंक के मुताबिक 1969 से 1990 के बीच सबसे धन और सबसे गरीब काउंटीज के बीच जायदाद से होने वाली आमदनी का अंतर दोगना बढ़ गया।
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थिंक टैंक ने कहा है कि उसके अनुसंधानकर्ताओं ने सरकारी संस्थानों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार की है। उसने कहा है कि अमेरिका की बड़ी आबादी ‘जायदाद दरिद्रता’ की शिकार है। उसके मुताबिक इस नजरिए से अभी तक गैर बराबरी को नहीं समझा गया है। उसकी रिपोर्ट में कहा गया है- ‘पिछले कुछ दशकों में देश के कई धनी इलाकों में जायदाद से होने वाली आमदनी तेजी से बढ़ी है। लेकिन बाकी लगभग 90 फीसदी काउंटीज में आमदनी ठहरी रही है।’

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रिपोर्ट में कहा गया है- ‘हमारे देश की अर्थव्यवस्था वित्त आधारित हो गई है। इस दौरान पिछले दो दशकों में हमने देखा है कि जायदाद से होने वाला मुनाफा कई गुना बढ़ गया है।’ संस्था ने इसकी वजह डिजिटल अर्थव्यवस्था का प्रचलन में आना और सरकारी की मौद्रिक नीति को माना है।

रिपोर्ट के मुताबिक धन की गैर-बराबरी सबसे ज्यादा बड़े शहरों में है। मसलन, न्यूयॉर्क के मैनहटन में औसत आमदनी पड़ोसी इलाके ब्रॉन्स बॉरॉ की तुलना में दो गुना ज्यादा है। लेकिन मैनहटन के भीतर भी नस्लीय आधार पर आमदनी की गैर-बराबरी मौजूद है। जायदाद का मालिक होने के कारण श्वेत समुदाय के लोगों और एक हद तक एशियाई समुदाय के लोगों की आददनी ब्लैक और हिस्पैनिक (स्पेनी भाषी) लोगों से काफी ज्यादा है। यहां के ब्लैक और हिस्पैनिक लोगों की आमदनी राष्ट्रीय औसत से भी कम है।

इंक्लूसिव बिल्डिंग इनिशिएटिव ने गैर-बराबरी के कारण पैदा हो हुई समस्या के समाधान की एक योजना सुझाई है। उसके मुताबिक अमेरिका सरकार को निम्न आय वर्ग के लोगों के रिटायरमेंट खाते में उनके अपने योगदान के बराबर रकम जमा करानी चाहिए। इससे 30 हजार डॉलर सालाना कमाने वाले लोग जब रिटायर होंगे, तब उनके खाते में लगभग छह लाख डॉलर होंगे। इससे उनकी वृद्धावस्था ठीक से कटेगी। साथ ही सामाजिक सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों से उनकी मदद की जा सकती है।
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