इसी एजेंसी के मुताबिक चीन के पास 15 से 20 लाख टन तांबा, आठ से नौ लाख टन एलुमिनियम, और ढाई से चार लाख टन जस्ता का भंडार है। इसके अलावा उसके पास सात हजार टन कोबाल्ट का भंडार है। कोबाल्ट बैटरी बनाने के लिहाज महत्वपूर्ण धातु है। लेकिन जानकारों का कहना है कि एनर्जी एस्पेक्ट्स जैसी एजेंसियों ने जो बताया है, वह सिर्फ अनुमान है। चीन ने इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। उनके मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार की ज्यादा दिलचस्पी इसमें नहीं है कि चीन के पास कितना भंडार है। बल्कि उसकी दिलचस्पी यह जानने में है कि जिस समय दुनियाभर में महंगाई बढ़ रही है, चीन अपने यहां कीमतों को काबू में रखने में कैसे कामयाब हो रहा है।
वैसे विश्लेषकों की राय है कि अगर कमोडिटी भंडार से वस्तुओं को जारी कर चीन महंगाई रोक रहा है, तो ऐसे उपाय कुछ समय तक ही कामयाब होंगे। एचएसबीसी बैंक के एशियन इकॉनिमिक्स शाखा के सह-प्रमुख फ्रेडरिक नॉर्मन ने एक समाचार एजेंसी से कहा- ‘चीनी अधिकारी अपने हालिया कदमों के जरिए कमोडिटी मूल्यों में वृद्धि को रोकने में सफल रहे हैं। लेकिन मूल रूप से कच्चे पदार्थों की कीमत अंतरराष्ट्रीय मांग और आपूर्ति की स्थिति से तय होती है। इसे चीनी अधिकारी परोक्ष रूप से प्रभावित नहीं कर सकते।’