ताइवान के लोगों का मनोबल तोड़ने के लिए चीन ‘मीडिया युद्ध’ का सहारा ले रहा है। ये बात एक नई किताब में कही गई है। किताब के लेखक केरी के. जरशानेक के मुताबिक जब ये सवाल आता है कि क्या चीन ताइवान पर हमला करेगा, तो ज्यादातर लोगों का ध्यान चीन की सैनिक तैयारियों की तरफ जाता है। लेकिन यह उसकी तैयारियों का आधा हिस्सा ही है। बाकी आधा हिस्सा ‘मीडिया युद्ध’ का है।
जरशानेक ने अपनी ताजा किताब में दावा किया है कि चीन ने ताइवान और मुख्य सहयोगी देश अमेरिका के खिलाफ पूरी दुनिया में प्रचार अभियान छेड़ रखा है। इस किताब में कहा गया है कि चीन की रणनीति में मीडिया युद्ध भी उतना ही अहम है, जितनी चीनी सेना की तैयारियां। चीन इन दोनों मोर्चों का इस्तेमाल एक दूसरे के अभियान में ताकत देने के लिए करता है। मीडिया युद्ध को कुछ जानकार जनमत युद्ध भी कहते हैं।
इसके तहत चीन सूचना देने और लोगों की सोच की प्रभावित करने के सभी माध्यमों का इस्तेमाल कर रहा है। इसका मकसद विरोधी खेमे को कमजोर करना, उसमें विभाजन पैदा करना, उसे भ्रमित करना, उसे अपने साथ मिलाने की कोशिश करना, और उसका मनोबल तोड़ना होता है।
जरशानेक के मुताबिक चीन इस मकसद के लिए उपलब्ध पुराने और नए दोनों प्रकार के माध्यमों का इस्तेमाल कर रहा है। पुराने माध्यमों में टेलीविजन, रेडियो और अखबार शामिल हैं। इसके अलावा उसने अपने पक्ष में गुजरे देशकों में कई किताबें भी लिखवाई हैं। अब वह इंटरनेट और सोशल मीडिया का भी व्यापक रूप से इस्तेमाल कर रहा है। इंटरनेट और सोशल मीडिया पर चीनी युद्धा अब काफी आक्रामक हो चुके हैँ।