अगले चुनाव के समय को लेकर सत्ताधारी नेपाली कांग्रेस और उसकी सहयोगी कम्युनिस्ट पार्टियों के बीच खींचतान बढ़ती जा रही है। बताया जाता है कि इससे प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। देउबा अपनी पार्टी या अपने सहयोगी दलों दोनों में से किसी को नाखुश करने की स्थिति में नहीं हैं।
बताया जाता है कि देउबा को इस प्रस्ताव को एतराज नहीं है कि स्थानीय चुनाव की तारीख खिसका दी जाए। लेकिन उनका विरोधी खेमा इस प्रस्ताव से सहमत नहीं है। निर्वाचन आयोग ने इन चुनावों को अप्रैल-मई में कराने की योजना पेश की है। नेपाली कांग्रेस के महासचिव गगन थापा ने एक सार्वजनिक बयान में कहा है कि स्थानीय चुनाव को निर्वाचन आयोग की योजना के मुताबिक कराया जाना चाहिए, ताकि शासन के इस स्तर पर खालीपन पैदा ना हो।
कई संवैधानिक और कानूनी विशेषज्ञों ने भी राय जताई है कि स्थानीय चुनाव अप्रैल-मई में कराना अनिवार्य है। इस मद्दे पर पैदा हुए भ्रम के बीच सत्ताधारी गठबंधन ने पिछले शुक्रवार को कहा था कि वह इस मामले में संवैधानिक विशेषज्ञों की राय लेगा। इस बीच एक राय यह भी जताई गई है कि संघीय, प्रांतीय, और स्थानीय- तीनों स्तरों के चुनाव को एक साथ ही कराए जाएं। सत्ताधारी दल के कुछ नेताओं ने इसके लिए सितंबर-अक्तूबर का समय सुझाया है।
नेपाली कांग्रेस के कई नेताओं ने मीडिया से अलग-अलग बातचीत में इस बात की पुष्टि की है कि चुनाव के समय को लेकर पार्टी के अंदर एक राय नहीं है। संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक देश में संघीय, प्रांतीय और स्थानीय स्तर के चुनाव इस वर्ष की समाप्ति से पहले संपन्न कराना अनिवार्य है। 2017 में स्थानीय चनाव मई से सितंबर के बीच कराए गए थे। उस वर्ष संघीय और प्रांतीय चुनाव 26 नवंबर और सात दिसंबर को हुए थे।
बताया जाता है कि सत्ताधारी गठबंधन में शामिल दोनों कम्युनिस्ट पार्टियां- माओइस्ट सेंटर और यूनिफाइड सोशलिस्ट चुनावों के लिए तैयार नहीं हैँ। इसलिए वे इसमें देर करना चाहती हैं। नेपाली कांग्रेस में इस मुद्दे पर अलग-अलग राय है। उधर विपक्षी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) जल्द से जल्द चुनाव की मांग कर रही है। उसका आरोप है कि सत्ताधारी गठबंधन जनता का सामना करने से डर रहा है।