नेपाल के वकीलों ने प्रधान न्यायाधीश चोलेंद्र शमशेर जेबी राणा को हटाने के लिए चलाए जा रहे अपने आंदोलन को और तेज कर दिया है। उन्होंने इस बारे में प्रतिनिधि सभा के स्पीकर अग्नि प्रसाद सपकोटा, नेशनल असेंबली के चेयरपर्सन गणेश प्रसात तिमिलसिना और देश के प्रमुख राजनीतिक दलों को एक ज्ञापन सौंपा है। इसमें नेपाल बार एसोसिएशन ने उन कारणों का विस्तार से जिक्र किया है, जिनकी वजह से वह प्रधान न्यायाधीश के इस्तीफे की मांग कर रही है।
बार एसोसिएशन का आरोप है कि चीफ जस्टिस राणा अपने पद की जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहे हैं। साथ ही वे न्यायपालिका के हितों की रक्षा भी नहीं कर पाए हैं। बार एसोसिएशन का ज्ञापन मिलने के बाद स्पीकर अग्नि प्रसाद सपकोटा ने कहा कि वे मौजूदा गतिरोध को दूर करने की पूरी कोशिश करेंगे। बार एसोसिएशन का आंदोलन एक महीने से भी ज्यादा समय से चल रहा है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही बुरी तरह प्रभावित हुई है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि जस्टिस राणा ने सरकार के साथ सौदेबाजी की और अपने एक रिश्तेदार को मंत्री बनवाया। इसके बदले उन्होंने राजनीतिक नियुक्तियों और राजनीतिक दल अधिनियम को दी गई चुनौती से संबंधित मामलों की सुनवाई में जानबूझ कर देर की है। आरोप है कि चीफ जस्टिस ने बार एसोसिएशन की चेतावनियों को नजरअंदाज करते हुए न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया है। ज्ञापन में यह इल्जाम भी लगाया गया है कि हत्या के मामले में सजायाफ्ता रंजन कोइराला के दंड को चीफ जस्टिस ने उस समय माफ कर दिया, जबकि अभी सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में सुनवाई जारी थी। वकीलों ने प्रधान न्यायाधीश पर घूस लेकर नियुक्तियां करने का आरोप भी लगाया है।
एक महीना से भी अधिक समय से नेपाल बार एसोसिएशन सुप्रीम कोर्ट में नुक्कड़ सभाओं का आयोजन कर रहा है, जिनमें चीफ जस्टिस राणा के खिलाफ भाषण दिए जाते हैं। कुछ दिन पहले एसोसिएशन ने अपने आंदोलन को देश भर में फैलाने का एलान किया। एसोसिएशन ने कहा है कि अब वह देश भर की अदालतों में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं के अलावा अन्य तमाम मामलों की सुनवाई रोक देगी। रक्ष्या बसयाल ने कहा है कि जस्टिस राणा के इस्तीफा देने तक वकीलों का आंदोलन जारी रहेगा।