9 अगस्त 1945 को परमाणु हमले के बाद नागासाकी शहर का यह हुआ था हाल
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युद्ध हमेशा सत्ता की साजिशों, सनक और गलत नीतियों का अंजाम होते हैं, जिसमें बेगुनाहों की लाशें बिछ जाती हैं। हम बात कर रहे हैं जापान के नागासाकी शहर की, जो आज से 77 साल पहले अमेरिका के दूसरे परमाणु बम का शिकार बना था। इस शहर की विडंबना यह रही कि यह अमेरिकी बमबारी वाले शहरों की सूची में सबसे नीचे था, लेकिन साजिश के चलते दूसरे नंबर पर आ गया था। दरअसल, एक तत्कालीन अमेरिकी मंत्री नहीं चाहते थे कि क्योटो शहर पर परमाणु बम गिराया जाए, इसलिए उसकी बजाए क्योटो को निशाना बनाया गया।
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान 1945 में अमेरिका ने जापान के हौसले पस्त करने के लिए छह अगस्त को उसके प्रमुख शहर हिरोशिमा पर दुनिया का पहला परमाणु बम गिराया था। इसके तीन दिन बाद यानी नौ अगस्त 1945 को नागासाकी पर दूसरा परमाणु बम गिराया। इससे ये दोनों शहर बर्बाद हो गए थे और लाखों लोगों की मौत हुई थी। 4000 डिग्री की गर्मी व आसमान से हुई काली बारिश ने जो मौत का तांडव मचाया, उसे देखे पूरी दुनिया सहम गई थी। उसके बाद से समूची दुनिया में हिरोशिमा व नागासाकी दिवस मनाकर परमाणु हथियारों का विरोध किया जाता है। हालांकि, दुनिया के परमाणु जखीरे में हर साल बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन दुआ कीजिए कि फिर कोई तानाशाह परमाणु बटन न दबाए और दुनिया ऐसा दिन न देखे।
आज यानी नौ अगस्त को नागासाकी की तबाही व जापान के ही शहर क्योटो को बचाने की साजिश के सच पर चर्चा लाजिमी है। 77 साल पहले आज ही के दिन अमेरिकी वायुसेना के B-29 बमवर्षक विमान जापान के कोकुरा शहर पर परमाणु बम गिराने जा रहे थे। लेकिन, उस दिन बादलों ने इस शहर को बचा लिया। बादलों व आसमान पर छाए विमानों के धुएं से इन विमानों को कोकुरा नजर नहीं आया। इस कारण उन्हें बम गिराने का ठिकाना बदलना पड़ा। अमेरिकी बमवर्षक ने सूची के अगले शहर क्योटो की बजाए नागासाकी का रुख किया और सुबह 11 बजकर 2 मिनट पर नागासाकी पर दूसरा और दुनिया का अब तक का अंतिम परमाणु बम गिरा दिया।
इसलिए बच गया था क्योटो
दरअसल, हिरोशिमा के बाद कोकुरा और फिर क्योटो पर बम गिराने की योजना थी, लेकिन तत्कालीन अमेरिकी युद्ध मंत्री हेनरी एम स्टिमसन ने क्योटो को बचा लिया और नागासाकी पर बम गिरवा दिया। माना जाता है कि 1920 के दशक में स्टिमसन ने क्योटो में हनीमून मनाया था। वह चाहते थे कि उनकी अमिट यादों के इस शहर को तबाही से बचाया जाए। इसलिए उन्होंने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रूमैन को क्योटो को बचाने की गुहार लगाई। र्ट्रूमैन उनकी बात मान गए और क्योटो का नाम हमले की निचली पंक्ति में रख दिया गया। इस तरह क्योटो बच गया, लेकिन उसकी जगह नागासाकी तबाह हो गया।