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अमेरिका: मुकेश अघी ने कहा- अमेरिकी कंपनियों के बीच भारत के बारे में धारणा बहुत सकारात्मक है

Fri, 24 Sep 2021 02:21 AM IST
देव कश्यप एएनआई, वाशिंगटन

सार

मुकेश अघी ने कहा कि मुझे लगता है कि भारत और अमेरिका के बीच अगले 12-18 महीनों के लिए व्यापार समझौते की उम्मीद नहीं है, लेकिन भारत और अमेरिका के बीच कुल व्यापार बढ़ रहा है, भले ही कोई सौदा हो या न हो। उन्होंने कहा हम जो देख रहे हैं वह यह है कि भारत से निर्यात बढ़ रहा है, वे अमेरिका में रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं।
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यूएस इंडिया स्ट्रेटेजिक एंड पार्टनरशिप फोरम के अध्यक्ष मुकेश अघी - फोटो : ANI
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विस्तार
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वाशिंटन डीसी में ‘यूएस इंडिया स्ट्रेटेजिक एंड पार्टनरशिप फोरम’ के अध्यक्ष मुकेश अघी ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत की। बातचीत के दौरान उन्होंने कई पहलुओं पर चर्चा की। अघी ने कहा कि 'अमेरिकी कंपनियों के बीच भारत के बारे में धारणा बहुत सकारात्मक है। जब आप प्रत्यक्ष एफडीआई को देखते हैं, तो साल दर साल अमेरिका से एफडीआई में 19 फीसदी की वृद्धि हुई है। भारत पर बोर्डरूम चर्चा यह है कि हम भारत में अधिक विनिर्माण को स्थानांतरित करने के लिए क्या कर रहे हैं।'

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मुकेश अघी ने कहा कि 'मुझे लगता है कि भारत और अमेरिका के बीच अगले 12-18 महीनों के लिए व्यापार समझौते की उम्मीद नहीं है, लेकिन भारत और अमेरिका के बीच कुल व्यापार बढ़ रहा है, भले ही कोई सौदा हो या न हो।' उन्होंने कहा हम जो देख रहे हैं वह यह है कि भारत से निर्यात बढ़ रहा है, वे अमेरिका में रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं, और समग्र व्यापार परिप्रेक्ष्य से भी हम बहुत अधिक द्विपक्षीय लेनदेन देख रहे हैं।

अघी ने कहा कि यह प्रधानमंत्री की अमेरिका की सातवीं यात्रा है और उन्होंने डेमोक्रेट्स, रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स के साथ फिर से बातचीत की है। पीएम मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति से  मजबूत संबंध बनाने में सक्षम हैं, चाहे राष्ट्रपति कोई भी हो। 
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मुकेश अघी ने कहा कि ट्रंप प्रशासन और बाइडन प्रशासन के बीच अंतर आप देखेंगे, ट्रंप से संबंध बहुत लेन-देन वाला था जबकि बाइडन बहुत अधिक बहुपक्षीय और स्ट्रक्चर्ड हैं।  यह क्वाड या वैक्सीन डिप्लोमेसी हो, आप भारत और अमेरिका के बीच बहुत अधिक स्ट्रक्चर्ड दृष्टिकोण देखेंगे जो बहुत अधिक प्रभावी है।

अघी ने कहा कि ‘क्वाड शिखर सम्मेलन हमारे समय की दो सबसे बड़ी चुनौतियों - महामारी और जलवायु परिवर्तन से निबटने के लिए आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करते हुए और टीका कूटनीति को बढ़ाते हुए व्यापार की आर्थिक क्षमता का लाभ उठाएगा।’

उन्होंने कहा, ‘विशेष रूप से समूह के भीतर, हम देखते हैं कि भारत और अमेरिका मजबूत साझेदारों के रूप में उभर रहे हैं, जो महसूस करते हैं कि रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के अलावा, क्षेत्रीय खतरों को कम करने और स्वतंत्र एवं खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को सुरक्षित करने की आवश्यकता है।’

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