रूस की राजधानी मास्को में बुधवार को मास्को-फार्मेट की तीसरी बैठक होने जा रही है। अफगानिस्तान के हालात और तालिबान को लेकर होने वाली ये बैठक काफी खास है। इस बैठक में 10 देशों शीर्ष अधिकारी शामिल हो रहे हैं, जिसमें एक भारत भी है। तालिबान का प्रतिनिधिमंडल भी इस बैठक में शामिल होगा।
भारत निभाएगा अहम भूमिका
रूस ने जानकारी दी है कि अफगानिस्तान के हालात को लेकर मास्को फार्मेट की बैठक में 10 देश और तालिबान का एक प्रतिनिधिमंडल हिस्सा लेगा। इस बैठक में भारत भी अहम भूमिका निभाएगा। अफगानिस्तान में तालिबान के आने के बाद से भारत ने उससे पूरी तरह से दूरी बना रखी है। तालिबान के आने के बाद से अब तक केवल एक ही बार 31 अगस्त को दोनों की औपचारिक बातचीत हुई है। ये बातचीत दोहा में हुई थी। तालिबान को लेकर भारत की स्थिति बेहद स्पष्ट है। भारत चाहता है कि अफगानिस्तान आतंकियों के लिए जन्नत न बन सके। भारत हमेशा से ही अफगानिस्तान की शांति और अखंडता का समर्थन करता रहा है।
अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बनने के करीब दो माह बाद भी भारत ने अब तक तालिबान को किसी भी तरह का सहयोग देने का कोई संकेत नहीं दिया है। भारत का यह भी कहना है कि वो तालिबान के मुद्दे पर विश्व बिरादरी के साथ है। अफगानिस्तान में स्थित अपने दूतावास और वाणिज्य दूतावासों को भारत पहले ही खाली कर चुका है। हालांकि तालिबान ने अपील की है कि इनको दोबारा शुरू करना चाहिए।