अमेरिकी फॉर्मा कंपनी मॉडर्ना ने कहा कि उसकी वैक्सीन छह माह तक संक्रमण से बचाने में कारगर है। कंपनी ने बयान जारी कर कहा है कि दूसरी डोज के बाद सुरक्षा कवच अगले छह माह तक प्रभावित नहीं हो सकता है। दूसरी डोज के बाद पहले दो महीने टीके का असर 96.2 फीसदी रहता है, जो छह माह बाद घटकर 83.7 हो जाता है।
कंपनी ने कहा है कि कोरोना के डेल्टा वैरिएंट से बचने के लिए बूस्टर डोज की जरूरत पड़ सकती है। कंपनी के प्रेसिडेंट डॉ. स्टीफन होज का कहना है कि टीके की तीन डोज सुरक्षित रहने के लिए जरूरी है।
टीका आने से पहले बायोलॉजिकल ई कंपनी का उत्पादन पर ध्यान
अगले एक महीने में, कोरोना से जंग में भारत को एक और स्वदेशी टीका मिल सकता है। फार्मा कंपनी बायोलॉजिकल ई के मुताबिक, सितंबर माह तक टीके का परीक्षण पूरा होने की उम्मीद है। टीके का नाम कॉर्बेवैक्स है, जिसे आरबीडी प्रोटीन सब यूनिट वैक्सीन के रूप में विकसित किया है।
इसका अभी तीसरे चरण का क्लिनिकल परीक्षण जारी है। कंपनी की एमडी महिमा दतला की केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया के साथ बैठक के दौरान टीके के परीक्षण और आपात इस्तेमाल की मंजूरी के बाद आपूर्ति पर उत्पादन पर अधिक जोर रहा। सरकार को पहले महीने में ही करीब एक करोड़ खुराक उपलब्ध कराने की उम्मीद है।