अमेरिका ने 2002 से 2017 के बीच अफगान सेना को 28 अरब डॉलर के हथियार दिए हैं, जिनमें बंदूक, रॉकेट, नाइट विजन गॉगल्स और खुफिया जानकारी जुटाने वाले छोटे ड्रोन शामिल हैं। यूएस गवर्नमेंट अकाउंटिबिल्टी ऑफिस के मुताबिक, 2003 से 2016 के बीच अफगान सेना को 208 विमान व हेलिकॉप्टर दिए गए।
इनमें से 40 से 50 विमान अफगान पायलट तालिबान हमले के दौरान उज्बेकिस्तान लेकर भागने में सफल रहे। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि काबुल पर हमले से एक सप्ताह पहले ही तालिबान ने योजना बनाकर अफगान पायलटों की हत्या करने का अभियान शुरू कर दिया था।
गेमचेंजर बन सकती है रात को लड़ने की तकनीक
एक अमेरिकी सैन्य अधिकारी ने सबसे ज्यादा चिंता तालिबान के हाथ लगे नाइट-विजन गॉगल्स और कम्युनिकेशंस उपकरण हैं। उन्होंने कहा कि रात को लड़ने की क्षमता असली गेमचेंजर साबित हो सकती है। अमेरिका ने अफगान सेना को 2003 से 16000 नाइट-विजन गॉगल्स और 162,000 संचार उपकरण दिए थे। अब इनमें से अधिकतर तालिबान के कब्जे में हैं।
अमेरिकी हथियारों से पंजशीर पर भी पड़ेगा भारी तालिबान
अमेरिका की तरफ से अफगान बलों को दिए गए 6 लाख इंफेंट्री हथियार, जिनमें घातक एम16 असॉल्ट राइफल भी शामिल है, अब तालिबान के कब्जे में हैं। अफगानिस्तान में सैन्य अभियान की देखरेख करने वाली यूएस सेंट्रल कमांड के 2016 से 2019 तक प्रमुख रहे रिटायर्ड जनरल जोसेफ वोटल तालिबान के हाथ लगी मशीन गनों, मोर्टारों और कई हॉवित्जर तोप को वहां के गृह युद्ध में बेहद अहम मान रहे हैं। उनका कहना है कि इस असलहे की बदौलत तालिबान अब तक अपने कब्जे में नहीं आने वाली पंजशीर घाटी में विरोधी गुटों पर एक एडवांटेज हासिल कर सकता है।
2014 से नहीं लिया अमेरिका ने सबक
अमेरिकी सैन्य विशेषज्ञ इस बात से हैरान हैं कि उनकी सेना ने 2014 में इराक में की गई गलती से सबक नहीं लिया, जहां आईएसआईएस के आतंकियों ने अमेरिकी सेना से इराकी बलों को मिले हथियार अपने कब्जे में ले लिए थे।
अब क्या है बाइडन प्रशासन पर विकल्प
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन के पास अब इस स्थिति से निपटने के लिए बेहद सीमित विकल्प हैं। अधिकारियों के अनुसार, हेलिकॉप्टर, विमान जैसे बड़े हथियारों के खिलाफ हवाई हमले किए जा सकते हैं, लेकिन इससे तालिबान के भड़कने की चिंता है और इस समय अमेरिका का प्राथमिक लक्ष्य वहां से अपने लोगों को निकालना है।