मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि एक दर्जन से ज्यादा राज्यों में टेक्सस जैसा कानून बनाने की प्रक्रिया चल रही है। कई राज्यों में पारित हुए ऐसे कानून को या तो उस राज्य की अदालत या फिर सुप्रीम कोर्ट ने रोक दिया था। लेकिन टेक्सस के कानून को दोनों स्तरों पर अदालती हरी झंडी मिल गई है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक ये फैसला अब उन राज्यों के मामले में भी मिसाल बन सकता है।
जिन राज्यों के कानून को अदालतों ने रद्द कर दिया था, उनमें नॉर्थ डकोटा, आयोवा, अरकंसास, अलाबामा, मिसिसिपी और जॉर्जिया शामिल हैं। उनके अलावा भी कई राज्यों में कानून पारित किए गए हैं, जिन पर फिलहाल रोक लगी हुई है। कानून के जानकारों का कहना है कि अब इन राज्यों में संबंधित कानून को टेक्सस की तर्ज पर लिख कर पारित कराया जा सकेगा।
आलोचकों का कहना है कि बाइडन प्रशासन ने पहले ऐसे कानूनों को गंभीरता से नहीं लिया। वह इस भ्रम में रहा कि सुप्रीम कोर्ट इन कानूनों को रद्द कर देगा। डेमोक्रेटिक पार्टी के चुनाव सर्वेक्षकों में से एक मार्क मेलमैन ने टीवी चैनल सीएनएन से कहा- ‘डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए ताजा घटना नीतिगत रूप से विनाशकारी है। लेकिन इससे अब पार्टी नेताओं को यह समझ में आएगा कि गर्भपात के अधिकार का मुद्दा ऐसा नहीं है, जिसे अंतिम रूप से सुलझा हुआ समझ लिया जाए।’